Tag: Premchand

premchand

जुरमाना

सहृदयता और अच्छाई, प्रदर्शन और ढोल पीटकर बताने वाली चीज़ें नहीं हैं.. अगर कोई भी मनुष्य अच्छा है तो वह उसके व्यवहार में दिखेगा, अन्यथा नहीं..! ये शायद हम ही हैं जो अपने पूर्वाग्रहों के चलते किसी इंसान के बारे में अपनी राय बना लेते हैं क्योंकि एक समय पर उस इंसान ने वह नहीं किया था, जो हमें उससे अपेक्षित था! इस कहानी 'जुरमाना' के दारोग़ा और अल्लारक्खी में भी यही द्वंद्व है.. पढ़िए!
premchand

राष्ट्र का सेवक

राष्ट्र के सेवक ने कहा— "देश की मुक्ति का एक ही उपाय है और वह है नीचों के साथ भाईचारे का सुलूक, पतितों के...
premchand

मिट्ठू

आज भी गली-मोहल्लों में गली में रहने-फिरने वाले जानवरों को परेशान करते लोग मिल जाएंगे.. यह आम दिन की बात है, जबकि होली और दिवाली जैसे त्योहारों पर तो ये जानवर दूसरी ही दुनिया ढूँढने लगते हैं.. ऐसा इसलिए होता है कि बच्चों को उनके बचपन से ही जानवरों से स्नेह, दया और लगाव जैसे भाव रखना नहीं सिखाया गया.. उन्होंने हमेशा अपने बड़ों को जानवरों को दुत्कारते ही देखा.. ऐसे में प्रेमचंद की यह कहानी अगर आप अपने घर के बच्चों को पढाएंगे या सुनाएंगे तो शायद उनके मन में से जानवरों के प्रति भय और घिन्न थोड़ी दूर हो!
premchand

आहुति

'आहुति' - प्रेमचंद आनन्द ने गद्देदार कुर्सी पर बैठकर सिगार जलाते हुए कहा- आज विशम्भर ने कैसी हिमाकत की! इम्तहान करीब है और आप आज...
premchand

कफ़न

'कफ़न' - प्रेमचंद झोपड़े के द्वार पर बाप और बेटा दोनों एक बुझे हुए अलाव के सामने चुपचाप बैठे हुए हैं और अन्दर बेटे की...
premchand

माँ

"करूणा द्वार पर आ बैठती और मुहल्ले-भर के लड़कों को जमा करके दूध पिलाती। दोपहर तक मक्खन निकालती और वह मक्खन मुहल्ले के लड़के खाते। फिर भाँति-भाँति के पकवान बनाती और कुत्तों को खिलाती। अब यही उसका नित्य का नियम हो गया। चिड़ियाँ, कुत्ते, बिल्लियाँ चींटे-चीटियाँ सब अपने हो गये। प्रेम का वह द्वार अब किसी के लिए बन्द न था। उस अंगुल-भर जगह में, जो प्रकाश के लिए भी काफी न थी, अब समस्त संसार समा गया था।"
premchand

अलग्योझा

क्या आप अपने माता-पिता को समझाते-समझाते हार गए हैं कि वे ऐसे रिश्तेदारों/भाईयों का साथ न दें या उनकी शर्म/आदर न करें जो उनसे स्नेह तक नहीं रखते? लेकिन उनका जवाब कुछ ऐसा होता है कि- "लाठी मारने से पानी अलग हो सकता है भला?" प्रेमचंद की कहानी 'अलग्योझा' एक ऐसा दस्तावेज है जिसमें झाँकने से हमें पता लगता है कि हमारे अपनों का यह 'उदार' व्यवहार, उनकी धोखा खाने की आदत की वजह से नहीं है, बल्कि उस दृष्टि की वजह से है जिससे पहले लोग रिश्तों को देखा करते थे! एक स्तर पर प्रासंगिक न भी लगे, फिर भी पढ़ कर देखिए! :)
premchand

सौत

'सौत' - प्रेमचंद 1 जब रजिया के दो-तीन बच्चे होकर मर गये और उम्र ढल चली, तो रामू का प्रेम उससे कुछ कम होने लगा...
premchand

ठाकुर का कुआँ

जोखू ने लोटा मुँह से लगाया तो पानी में सख्त बदबू आयी। गंगी से बोला- "यह कैसा पानी है? मारे बास के पिया नहीं...
Gaban

प्रेमचंद – ‘ग़बन’

प्रेमचंद के उपन्यास 'ग़बन' से उद्धरण | Quotes from Gaban by Premchand   "जब हम कोई काम करने की इच्छा करते हैं, तो शक्ति आप ही...
premchand

ईदगाह

'ईदगाह' - प्रेमचंद 1 रमजान के पूरे तीस रोजों के बाद ईद आयी है। कितना मनोहर, कितना सुहावना प्रभाव है। वृक्षों पर अजीब हरियाली है, खेतों...
premchand

पूस की रात

'Poos Ki Raat', a story by Premchand हल्कू ने आकर स्त्री से कहा- सहना आया है, लाओ, जो रुपये रखे हैं, उसे दे दूँ, किसी...
कॉपी नहीं, शेयर करें! ;)