Tag: विरह / जुदाई
विरह का जलजात जीवन
'Virah Ka Jaljat Jivan', a poem by Mahadevi Verma
विरह का जलजात जीवन, विरह का जलजात!
वेदना में जन्म, करुणा में मिला आवास
अश्रु चुनता दिवस इसका,...
सब्र आता है जुदाई में न ख़्वाब आता है
सब्र आता है जुदाई में, न ख़्वाब आता है
रात आती है इलाही कि अज़ाब आता है
बे-क़रारी दिल-ए-बेताब की ख़ाली तो नहीं
या वो ख़ुद आते...
जोहता हूँ बाट रानी
'Johta Hoon Baat Rani', a poem by Bedhab Banarasi
शीघ्र आओ प्रेम का मेरे न उलटे ठाठ रानी!
है असह्य वियोग बाले
है निशा टलती न टाले
करवटें...

