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कहानी
कहानी की तरह हो तुम,
माथे से लेकर पैर तक, पूरी कहानी ही हो;
गाल्ज़वर्दी की कहानियाँ जिस अंदाज़ में
आश्चर्य ले आया करती हैं तुम्हें देखकर
ठीक वैसा...
ख़लिश
वजूद की कतरन जोड़ के
हस्ती का लिबास
अब जचे ख़ुद पे
ये शक़ है मुझे
ज़र्रा होकर बिखरने को,
मुस्तैद है मेरी रूह का पैकर
पर अब मार जाता है
मुझे...
अक्स-ए-चाँद
ख़ुद को नाशाद करने का हुनर
शौक़ से तो नहीं आता,
तहज़ीब भी बेख़ुदी की
किसी शऊर की मोहताज नहीं,
बेकसी से ताअल्लुक़ कोई यूँ नहीं रखता,
बेज़ारी शेवा...
मौत
किसे जीने का तरीका आता है यहाँ
या सब मशगूल है मरने में,
तबियत एक की पूछो तो;
सब के सब बीमार से दिखने लगते हैं
मैं तोहमतें...
डेट
क्या पहनूँगा उस दिन
जिस दिन तुमसे मिलूँगा
एक अजीब-सी मुस्कुराहट
जो समय-समय पर डर जाया करेगी
तुम्हारी पुरअसर बातों से,
रेस्तरां की खिड़की की ओर मुँह करके-
लोगों को गिनूंगा
या...
मज़दूर
एक बूढ़ा सा डस्टर था,
कुछ उजली चॉक औंधे मुँह पड़ी थी,
एक अपाहिज कुर्सी,
पर वो अपने आप में अपराजिता थी
और काला-सा ब्लैक बोर्ड
एकदम काला-
मुरझा गया...


