एक वसंत, जो टांगा हुआ है मैंने
इस रहस्यमयी खिड़की के उस पार
वो वसंत,
जिसे देखने भर को भी खोलनी पड़ती है, वो खिड़की- मंत्रों का जादू फूँक कर
वो वसंत, जिसे देख कर
हर बार,
हर एक बार
पलट आना होता है
…मन के पतझड़ में!

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