विकृति

धर्म देश से बड़ा हुआ है
उंगली बनकर खड़ा हुआ है
जितना बाहर से उम्दा दिखता
अंदर उतना सड़ा हुआ है।

लाठी सहारे चलने वाला
खुली सड़क पर पड़ा हुआ है
लोलुप कीड़ा सत्ता का
कुर्सी में ही गड़ा हुआ है।

जितनी कमर में लचक पड़ी है
हृदय उतना ही कड़ा हुआ है
आडम्बर ही आडम्बर है
भरा पाप का घड़ा हुआ है।

सर कहीं पर घूम रहा है
धड़ कहीं पर पड़ा हुआ है
भूखी सोती आधी दुनिया
लाश पे हीरा जड़ा हुआ है।

जिसका जितना दिल है छोटा
वो ही उतना बड़ा हुआ है
झूठी कसमें खा-खा कर के
सबका पेट बड़ा हुआ है।

चिड़िया चील से न्याय माँगती
देखो कैसा दुखड़ा हुआ है
लेकर हाथ में गिद्ध तलवारें
जीवन बचाने खड़ा हुआ है।

बाँधे करेला शहद की पुड़िया
तितली बदन अकड़ा हुआ है
पराग ले गया जौंक चूस के
भौंरा ख़ून पर पड़ा हुआ है।

नीम पर चढ़ के घाव पुकारे
पत्ता-पत्ता झड़ा हुआ है
जितने काम थे सारे रह गये
औंधेमुँह युग पड़ा हुआ है।

आजा प्यारे! दु:ख बतियाले
जीवन शेष गर पड़ा हुआ है
वैसे भी इस नगरी में यम
कदम-कदम पर खड़ा हुआ है।

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