आलोक आज़ाद

आलोक आज़ाद
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I am PhD final year student in JNU and a passionate poet ... I have published a poetry book named- Daman ke khilaaf

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Recent Posts

Swayam Prakash

चौथा हादसा

मेरा तबादला जैसलमेर हो गया था और वहाँ की फ़िज़ा में ऐसा धीरज, इतनी उदासी, ऐसा इत्मीनान, इस क़दर अनमनापन, ऐसा 'नेचा' है कि...
Sharad Billore

हम आज़ाद हैं

सतरंगे पोस्टर चिपका दिए हैं हमने दुनिया के बाज़ार में कि हम आज़ाद हैं। हम चीख़ रहे हैं चौराहों पर हम आज़ाद हैं हम आज़ाद हैं क्योंकि हमने भूख से मरते क़र्ज़ के नीचे...
Dharmvir Bharati

थके हुए कलाकार से

सृजन की थकन भूल जा देवता अभी तो पड़ी है धरा अधबनी! अभी तो पलक में नहीं खिल सकी नवल कल्पना की मधुर चाँदनी, अभी अधखिली ज्योत्सना की...
Majaz Lakhnavi

नहीं ये फ़िक्र कोई रहबर-ए-कामिल नहीं मिलता

नहीं ये फ़िक्र कोई रहबर-ए-कामिल नहीं मिलता कोई दुनिया में मानूस-ए-मिज़ाज-ए-दिल नहीं मिलता कभी साहिल पे रहकर शौक़ तूफ़ानों से टकराएँ कभी तूफ़ाँ में रहकर फ़िक्र है...
Ahmad Nadeem Qasmi

कौन कहता है कि मौत आयी तो मर जाऊँगा

कौन कहता है कि मौत आयी तो मर जाऊँगा मैं तो दरिया हूँ, समुंदर में उतर जाऊँगा तेरा दर छोड़ के मैं और किधर जाऊँगा घर में...
Darkness, Stairs

गिरना

आपाधापी में गुज़रते समय से गुज़रकर लगता है कि हम मनुष्य नहीं रहे समय हो चले हैं हम बस बीत रहे हैं—लगातार। हमारा बीतना किसी निविड़ अन्धकार में...
Woman india

तरुणियाँ

उनमें देखी गईं सम्भावनाएँ खोजे गए अवसर, कब, कैसे, कहाँ व्यवहार में लायी जा सकती थी उनकी जाति— इसका गरिमायुक्त सावधानी के साथ प्रयोग किया गया उनको दो राज्यों की...
Fish Eyes, Boy, Girl, Abstract

भाषा बनाम कवि

कितनी अशक्त है वह भाषा जो नहीं कर पाती पक्षियों के कलरव का अनुवाद जिसके व्याकरण में सज़ायाफ़्ता हैं मछलियाँ मेहराबों पर तैर नहीं सकतीं जिसके सीमान्त में रहते...
Gaurav Bharti

मैं ख़ुद को हत्यारा होने से बचा रहा हूँ

बहुत ही लापरवाह रहा हूँ मैं अपनी देह को लेकर पहनने-ओढ़ने का शऊर भी नहीं रहा कभी मुझे ध्यान नहीं रहता कब बढ़ जाते हैं मेरे नाख़ून झड़ने लगे...
Doodhnath Singh

जब मैं हार गया

जब मैं हार गया सब कुछ करके मुझे नींद आ गई जब मैं गुहार लगाते-लगाते थक गया मुझे नींद आ गई जब मैं भरपेट सोकर उठा हड़बोंग में फँसा,...
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