ख़ूबसूरती में उसकी
मिसाल ढूँढना
मुम्किन नहीं
क्योंकि वो
किताबों की सीली पर
सजी महक है,
समुंदरी लहरातों से
तराशा हुआ
सुर्मई पत्थर है,
सर्द रातों में
स्लाइडिंग से नज़र आती
हलकी नीली चमक है,
चटख़ारे के ठीक दरमियान
पैदा होने वाला रस है,
फिर भी उस काफ़िर को
मेरे इस यक़ीन पर
शक है
कि वो क़ुदरत की
सब से हसीन तख़लीक़ है!





