Tag: प्रेम

Read here the best Hindi Love Poems and Stories

Antas Ki Khurchan - Yatish Kumar

‘अन्तस की खुरचन’ से कविताएँ

यतीश कुमार की कविताओं को मैंने पढ़ा। अच्छी रचना से मुझे सार्वजनिकता मिलती है। मैं कुछ और सार्वजनिक हुआ, कुछ और बाहर हुआ, कुछ...
Khoyi Cheezon Ka Shok - Savita Singh

‘खोई चीज़ों का शोक’ से कविताएँ

सविता सिंह का नया कविता संग्रह 'खोई चीज़ों का शोक' सघन भावनात्मक आवेश से युक्त कविताओं की एक शृंखला है जो अत्यन्त निजी होते...
Abstract, Woman

जीवन सपना था, प्रेम का मौन

जीवन सपना था आँखें सपनों में रहीं और सपने झाँकते रहे आँखों की कोर से यूँ रची हमने अपनी दुनिया जैसे बचपन की याद की गईं कविताएँ हमारा दुहराया...
Gaurav Bharti

कविताएँ: नवम्बर 2021

यात्री भ्रम कितना ख़ूबसूरत हो सकता है? इसका एक ही जवाब है मेरे पास कि तुम्हारे होने के भ्रम ने मुझे ज़िन्दा रखातुम्हारे होने के भ्रम में मैंने शहर...
Aashika Shivangi Singh

आशिका शिवांगी सिंह की कविताएँ

माँ-पिता प्रेमी-प्रेमिका नहीं बन सके मेरी माँ जब भी कहती है— "प्रेम विवाह ज़्यादा दिन नहीं चलते, टूट जाते हैं" तब अकस्मात ही मुझे याद आने लगते...
Hungry, Poor

अहमद नियाज़ रज़्ज़ाक़ी की नज़्में

अब अब कहाँ है ज़बान की क़ीमत हर नज़र पुर-फ़रेब लगती है हर ज़ेहन शातिराना चाल चले धड़कनें झूठ बोलने पे तुलीं हाथ उठते हैं बेगुनाहों पर पाँव अब रौंदते...
Prayers, Joined Hands

अनुत्तरित प्रार्थना

'परिवर्तन प्रकृति का नियम है' यह पढ़ते-पढ़ाते वक़्त मैंने पूरी शिद्दत के साथ अपने रिश्तों में की स्थिरता की कामनाप्रकृति हर असहज कार्य भी पूरी सहजता के...
Gaurav Bharti

कविताएँ: सितम्बर 2021

हादसा मेरे साथ प्रेम कम उसकी स्मृतियाँ ज़्यादा रहींप्रेम जिसका अन्त मुझ पर एक हादसे की तरह बीता मुझे उस हादसे पर भी प्रेम आता है। गंध मैं तुम्हें याद करता हूँ दुनिया...
Couple in front of the ocean

एक दिन करेंगे बात केवल प्यार की

एक दिन करेंगे बात केवल प्यार की!तुम कहोगे—रुको तो मैं नहीं दिलाऊँगी याद कि आठ बज गये हैं चाँद चढ़ गया है लौट जाओ घर तुम कि तुम्हारे होने...
Ashok Kumar

अशोक कुमार की कविताएँ

साथ रहना कितना आसान है सबकी अपनी भाषा थी पहाड़ों की अपनी नदियों की अपनी और हमारी अपनी अलगमैं, पहाड़ और नदियाँ फिर भी साथ-साथ रहे सबसे सूखे दिनों को उदासी...
Abstract, Human

नज़्में : तसनीफ़

मैं और एक कुल्हाड़ी इस बग़ीचे में मैंने जितने पौदे लगाए हैं किसी दिन अपनी उदासी की कुल्हाड़ी से मैं ही उन्हें उखाड़ फेंकूँगामेरे अंदर वहशत के बीज...
John Donne

जॉन डन की कविता ‘मैं इसलिए नहीं जा रहा हूँ’

कविता: 'मैं इसलिए नहीं जा रहा हूँ' ('Sweetest love, I do not go') कवि: जॉन डन (John Donne)भावानुवाद: दिव्या श्रीमेरी प्यारी महबूबा! मैं इसलिए नहीं जा...

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Dunya Mikhail

दुन्या मिखाइल की कविता ‘चित्रकार बच्चा’

इराक़ी-अमेरिकी कवयित्री दुन्या मिखाइल (Dunya Mikhail) का जन्म बग़दाद में हुआ था और उन्होंने बग़दाद विश्वविधालय से बी.ए. की डिग्री प्राप्त की। सद्दाम हुसैन...
Muktibodh - T S Eliot

टी. एस. ईलियट के प्रति

पढ़ रहा था कल तुम्हारे काव्य कोऔर मेरे बिस्तरे के पास नीरव टिमटिमाते दीप के नीचे अँधेरे में घिरे भोले अँधेरे में घिरे सारे सुझाव, गहनतम संकेत! जाने...
Jeffrey McDaniel

जेफ़री मैकडैनियल की कविता ‘चुपचाप संसार’

जेफ़री मैकडैनियल (Jeffrey McDaniel) के पाँच कविता संग्रह आ चुके हैं, जिनमें से सबसे ताज़ा है 'चैपल ऑफ़ इनडवर्टेंट जॉय' (यूनिवर्सिटी ऑफ़ पिट्सबर्ग प्रेस,...
Antas Ki Khurchan - Yatish Kumar

‘अन्तस की खुरचन’ से कविताएँ

यतीश कुमार की कविताओं को मैंने पढ़ा। अच्छी रचना से मुझे सार्वजनिकता मिलती है। मैं कुछ और सार्वजनिक हुआ, कुछ और बाहर हुआ, कुछ...
Shivangi

उसके शब्दकोश से मैं ग़ायब हूँ

मेरी भाषा मेरी माँ की तरह ही मुझसे अनजान है वह मेरा नाम नहीं जानती उसके शब्दकोश से मैं ग़ायब हूँ मेरे नाम के अभाव से, परेशान वह बिलकुल माँ...
Savitribai Phule, Jyotiba Phule

सावित्रीबाई फुले का ज्योतिबा फुले को पत्र

Image Credit: Douluri Narayanaप्रिय सत्यरूप जोतीबा जी को सावित्री का प्रणाम,आपको पत्र लिखने की वजह यह है कि मुझे कई दिनों से बुख़ार हो रहा...
Khoyi Cheezon Ka Shok - Savita Singh

‘खोई चीज़ों का शोक’ से कविताएँ

सविता सिंह का नया कविता संग्रह 'खोई चीज़ों का शोक' सघन भावनात्मक आवेश से युक्त कविताओं की एक शृंखला है जो अत्यन्त निजी होते...
Rahul Tomar

कविताएँ: दिसम्बर 2021

आपत्तियाँ ट्रेन के जनरल डिब्बे में चार के लिए तय जगह पर छह बैठ जाते थे तो मुझे कोई आपत्ति नहीं होती थीस्लीपर में रात के समय...
Yashasvi Pathak

कविताएँ: दिसम्बर 2021

अंशतः अमान्य विचारों का समीकरण वह प्रभावकारी नहीं है उसमें संवेदन को परिवर्तित करने की क्षमता नहीं उससे समाज नहीं बनता है उसके स्रष्टा दो-तीन प्रकार के नहीं...
J V Pawar

‘दलित पैंथर ने दलित साहित्य का भूमण्डलीकरण किया’

दलित पैंथर के संस्थापक ज. वि. पवार से राजश्री सैकिया की बातचीत ज. वि. पवार दलित-पैंथर के संस्थापकों में एक रहे हैं। इस संगठन ने...
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