Tag: प्रेम

Read here the best Hindi Love Poems and Stories

Abstract, Head, Human

शिवम तोमर की कविताएँ

रोटी की गुणवत्ता जिस गाय को अम्मा खिलाती रहीं रोटियाँ और उसका माथा छूकर माँगती रहीं स्वर्ग में जगह अब घर के सामने आकर रम्भियाती रहती है अम्मा ने तो खटिया...
Markanday Rai Neerav

कविताएँ: मार्च 2021

कम नहीं है तुम्हारे अगले दाँतों के बीच में फाँक है पर्याप्त है उतनी जगह फलने को जो हमारे बीच है आकाश-भर की इच्छाएँ नहीं एक पेड़ की चाहत है जो...
Rahul Boyal

एक ही दृश्य में खोए हुए दो लोग

एक ही दृश्य में खोए हुए दो लोग कुछ पल के लिए अदृश्य हो जाना चाहते थे दुनिया के लिए उस अकेले दृश्य में बींध दिए जाने के स्वप्न...
Melancholy, Sadness

इंस्टा डायरी: उदास शहर की बातें

जाड़े की सर्दी में खुरदरी दीवार से सटकर रात बिताती मन की नंगी पीठ। अलकतरे से भी ज़्यादा काली रात में काली बिल्ली की...
Ashok Vajpeyi

वही तो नहीं रहने देगा

कविता संग्रह 'कहीं नहीं वहीं' से  प्रेम वही तो नहीं रहने देगा उसके शरीर की लय को, उसके लावण्य की आभा को उसके नेत्रों के क्षितिज ताकते एकान्त...
Abstract, Love, Couple

कितनी कम जगहें हैं प्रेम के लिए

कितना तो सहज होता है मौसम का यूँ ही मीठा हो जाना शेफालियों का अनायास झर जाना बारिशों का सोंधा हो जाना भर जाना आकाश का सम्भावनाओं से और...
Pigeon, Peace, Bird

प्रेम की डाक

ईश्वर के हरकारे चल पड़े हैं प्रेम की डाक लेकर वसंत ऋतु में उनके पास सभ्यता के प्रथम प्रेम की स्मृतियों की अनन्त कहानियाँ हैं रोशनी के आलोक में जब शहर स्थिर...
Girl, Woman, Smiling, Window

रुत

1 इधर उत्तरायण हुए सूर्य का मन माघ जल के छींटों से तृप्त हुआ और उधर गुलाबी सर्दी की तान ने नायक जनवरी को फ़रवरी के प्रेम में...
Gopaldas Neeraj

प्रेम-पथ हो न सूना

प्रेम-पथ हो न सूना कभी, इसलिए जिस जगह मैं थकूँ, उस जगह तुम चलो। क़ब्र-सी मौन धरती पड़ी पाँव पर शीश पर है कफ़न-सा घिरा आसमाँ, मौत की...
Hands, Love, Couple

प्रेम मेरे लिए

मैं नहीं मानता उसे प्रेम जिसमें एक व्यक्ति को नसीब हो रसातल दूसरे को मिले उन्मुक्त आकाश, इसे नहीं कहा जा सकता इंसाफ़। 'दोनों में बराबर बँटें दुःख' यह...
Mangalesh Dabral

प्रेम करती स्त्री

प्रेम करती स्त्री देखती है एक सपना रोज़ जागने पर सोचती है क्या था वह निकालने बैठती है अर्थ दिखती हैं उसे आमफ़हम चीज़ें कोई रेतीली जगह लगातार बहता नल उसका...
Kirti Chaudhary

प्यार करो

प्यार करो अपने से मुझसे नहीं सभी से प्यार करो। वह जो आँखों से दूर उपेक्षित पड़ा हुआ, वह जो मिट्टी की सौ पर्तों में गड़ा हुआ। वह जिसकी साँसें अभी आश्रित जीती...

STAY CONNECTED

37,762FansLike
16,586FollowersFollow
22,311FollowersFollow
1,210SubscribersSubscribe

RECENT POSTS

Silent, Quiet, Silence, Woman, Shut, Do not speak, Taboo

अंधेरे के नाख़ून

एक छोर से चढ़ता आता है रोशनी को लीलता हुआ एक ब्लैक होल, अंधेरे का नश्तर चीर देता है आसमान का सीना, और बरस पड़ता है बेनूर...
Adarsh Bhushan

लाठी भी कोई खाने की चीज़ होती है क्या?

हमारे देश में लाठियाँ कब आयीं यह उचित प्रश्न नहीं कहाँ से आयीं यह भी बेहूदगी भरा सवाल होगा लाठियाँ कैसे चलीं कहाँ चलीं कहाँ से कहाँ तक चलीं क्या पाया...
Raghuvir Sahay

चेहरा

चेहरा कितनी विकट चीज़ है जैसे-जैसे उम्र गुज़रती है वह या तो एक दोस्त होता जाता है या तो दुश्मन देखो, सब चेहरों को देखो पहली बार जिन्हें...
Kumar Ambuj

कुछ समुच्चय

स्मृति की नदी वह दूर से बहती आती है, गिरती है वेग से उसी से चलती हैं जीवन की पनचक्कियाँ वसंत-1 दिन और रात में नुकीलापन नहीं है मगर...
Gaurav Bharti

हम मारे गए

हमें डूबना ही था और हम डूब गए हमें मरना ही था और हम मारे गए हम लड़ रहे थे कई स्तरों पर लड़ रहे थे हमने निर्वासन का दंश...
Rahul Sankrityayan

तुम्हारे धर्म की क्षय

वैसे तो धर्मों में आपस में मतभेद है। एक पूरब मुँह करके पूजा करने का विधान करता है, तो दूसरा पश्चिम की ओर। एक...
Melancholy, Sadness, Night

लाखन सिंह की कविताएँ

1 जीना किसी सड़ी लाश को खाने जैसा हो गया है, हर एक साँस के साथ निगलता हूँ उलझी हुई अंतड़ियाँ, इंद्रियों से चिपटा हुआ अपराधबोध घिसटता है माँस के लोथड़े...
Abstract, Head, Human

शिवम तोमर की कविताएँ

रोटी की गुणवत्ता जिस गाय को अम्मा खिलाती रहीं रोटियाँ और उसका माथा छूकर माँगती रहीं स्वर्ग में जगह अब घर के सामने आकर रम्भियाती रहती है अम्मा ने तो खटिया...
Agyeya

युद्ध-विराम

नहीं, अभी कुछ नहीं बदला है। अब भी ये रौंदे हुए खेत हमारी अवरुद्ध जिजिविषा के सहमे हुए साक्षी हैं; अब भी ये दलदल में फँसी हुई मौत की मशीनें उनके...
Rahul Boyal

जब तुम समझने लगो ज़िन्दगी

वो जहाँ पर मेरी नज़र ठहरी हुई है वहाँ ग़ौर से देखो तुम तुम भी वहाँ हो मेरे साथ मेरे दाएँ हाथ की उँगलियों में उलझी हुई हैं...
कॉपी नहीं, शेयर करें! ;-)