मैं नौका में हूँ या भँवर में हूँ
मैं सरिता में हूँ या लहर में हूँ
हे देव तुम्ही बता दो…
मेरा किनारा कहाँ है?

मैं पाप में हूँ कि पुण्य में हूँ
मैं अनंत में हूँ कि शून्य में हूँ
हे देव तुम्ही बता दो…
मेरा धरातल कहाँ है?

मैं पीड़ा में हूँ कि आनंद में हूँ
मैं निष्कर्ष में हूँ कि द्वंद्व में हूँ,
हे! देव तुम्ही बता दो…
मेरा परिणाम कहाँ है?

मैं ध्वंस में हूँ या सृजन में हूँ
मैं उत्थान में हूँ या पतन में हूँ
हे! देव तुम्ही बता दो…
मेरी अधोगति कहाँ है?

मैं उन्नति में हूँ कि अवनति में हूँ
मैं भ्रंश में हूँ कि प्रोन्नति में हूँ
हे! देव तुम्ही बता दो…
मेरा मूल्यांकन कहाँ है?

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नम्रता श्रीवास्तव
अध्यापिका, एक कहानी संग्रह-'ज़िन्दगी- वाटर कलर से हेयर कलर तक' तथा एक कविता संग्रह 'कविता!तुम, मैं और........... प्रकाशित।

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