कैसी है वह
कितनी सुन्दर?

इसे किसी प्रमेय की तरह
मुझे नहीं सिद्ध करना है

वह देखने में कितनी दुबली-पुतली
क्षीण काया
पर इसके अन्तर में है
विशाल हृदय
मैं क्या, सारी दुनिया समा सकती है

जब भी गिरता हूँ
वह सम्भालती है
जब भी बिखरता हूँ
वह बटोरती है
तिनका-तिनका जोड़
चिड़िया बनाती है अपना घोंसला
वैसे ही वह बुनती है घोंसला
शीत-घाम से बचाती है

मैं कहता हूँ
उसके सौन्दर्य के सामने
मेरी नज़र में
सब फीके हैं

उसका सौन्दर्य मेरे लिए
गहन अनुभूति है
लिखी जा सकती है उससे
दुनिया की सबसे सुन्दर कविता।

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