घर से भागी हुई लड़कियाँ कुछ दिनों बाद बरामद कर ली जाती हैं
चोरी के सामान की तरह
और लौटा दी जाती हैं फिर से उसी बैरंग दुनिया में!

इस क्रिया की तीखी प्रतिक्रिया होती है

छीन लिया जाता है छोटी बहनों से फ़ोन
जींन्स-टी शर्ट से लेकर टीवी देखने तक पर थोप दी जाती है सेंसरशिप

घर को ही बना दिया जाता है कॉचिंग सेंटर
संदेहास्पद समझा जाने लगता है हर एक रिश्ता

क़त्ल कर दिए जाते हैं परिवार की सब लड़कियों के आगे बढ़ने के सपने

और फिर
फिर क्रिया की प्रतिक्रिया होती है

कुछ ज़िद्दी लड़कियाँ फिर से भाग जाती हैं घर से
इस बार वे कहीं से भी बरामद नहीं होती!!

रूपम मिश्रा की कविता 'ये लड़कियाँ बथुआ की तरह उगी थीं'

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बी.एल. पारस
Author, Poet & Critic

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