‘Ghar Se Bhagi Hui Ladkiyan’, a poem by B. L. Paras

घर से भागी हुई लड़कियाँ कुछ दिनों बाद बरामद कर ली जाती हैं
चोरी के सामान की तरह
और लौटा दी जाती हैं फिर से उसी बैरंग दुनिया में!

इस क्रिया की तीखी प्रतिक्रिया होती है

छीन लिया जाता है छोटी बहनों से फ़ोन
जींन्स-टी शर्ट से लेकर टीवी देखने तक पर थोप दी जाती है सेंसरशिप

घर को ही बना दिया जाता है कॉचिंग सेंटर
संदेहास्पद समझा जाने लगता है हर एक रिश्ता

क़त्ल कर दिए जाते हैं परिवार की सब लड़कियों के आगे बढ़ने के सपने

और फिर
फिर क्रिया की प्रतिक्रिया होती है

कुछ ज़िद्दी लड़कियाँ फिर से भाग जाती हैं घर से
इस बार वे कहीं से भी बरामद नहीं होती!!

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