रिकार्डो अलैक्जो का जन्म 1960 में मिनास गेराइस के बेलो होरीज़ोंटे में हुआ था। रिकार्डो अपनी समाज और दृश्यपरक कविताओं के लिए विख्यात हैं और इनकी गणना ब्राज़ील के सबसे प्रयोगधर्मी समकालीन कवियों में होती है।

2004 में रिकार्डो को नेशनल लाइब्रेरी फाउंडेशन की ओर से ग्रान्ट मिला था और 2010 में ब्राज़ील के शिक्षा मंत्रालय की ओर से लिटरेचरा पारा तोडोस नामक पुरस्कार दिया गया था।

यहाँ प्रस्तुत कविता वर्ड्स विदाउट बॉर्डर्स नामक पत्रिका से ली गई है। डैन हैनरैहन ने इनकी कविताओं का पुर्तगाली से अंग्रेज़ी में अनुवाद किया हैं।

‘I Know You By Your Scent’ – Ricardo Aleixo
अंग्रेज़ी से अनुवाद: कुशाग्र अद्वैत

मैं तुम्हें तुम्हारी
गन्ध से जानता हूँ

तुम्हारे कपड़ों से
तुम्हारी कार से

तुम्हारी अँगूठी से
और बेशक़,

तुम्हारे पैसों के
प्रेम से

उन पैसों के प्रेम से
जो कोई दूरस्थ पूर्वज
तुम्हारे लिए
विरसे में छोड़ गया है

मैं तुम्हें तुम्हारी
गन्ध से जानता हूँ

और डॉलर के चिह्नों से
जो अलंकृत करते हैं
तुम्हारी मुश्किल से कभी
झपकने वाली आँखों को

तुम्हारे पैसों
से प्रेम के लिए।

तुम्हारे पैसों
से प्रेम के लिए

और उन सब जगहों के लिए
जहाँ जीवन बारम्बार
नकारा जाता है:

पागलखाने, जेलें
और सरहदें

मैं तुम्हें तुम्हारी
गन्ध से जानता हूँ

मैं तुम्हें
भय और महामारी की मुई
गन्ध से जानता हूँ
जहाँ भी तुम जाते हो
वहाँ यह गन्ध फैल जाती है

मैं तुम्हें
तुम्हारे पैसों से
प्रेम के लिए जानता हूँ

जिसके अनुसार
ईश्वर एक तुच्छ पिता है
जो अपने चमत्कारों
के बदले शुल्क लेता है

मैं तुम्हें तुम्हारी
गन्ध से जानता हूँ

मैं तुम्हें तुम्हारी गन्धक की
गन्ध से जानता हूँ
जिसे तुम छिपा नहीं सकते
और जो उन सब चीज़ों पर
चिमट जाती है
जिसे तुम छूते हो

मैं तुम्हें तुम्हारी
गन्ध से जानता हूँ।

मैं तुम्हें तुम्हारी
गन्ध से जानता हूँ

तुम में से
किसी एक को सूँघ कर
तुम्हारी पूरी क़ौम का
अंदाज़ा लगाया जा सकता है
और मैंने तो
तुम सबको सूँघा है,

तुम सबको
जो सिर्फ़ पैसों
के लिए जीवित हैं

पैसों से
प्रेम के लिए
तुम मुस्कान, खुशी और
कविता के प्रत्युत्तर में
घृणा बाँटते हो

पैसों
से प्रेम के लिए

तुम अपनी बेटियों को भी
अपरिवर्तनीय मुद्राओं और
सोने की पट्टियों में बदल देते हो

मैं तुम्हें तुम्हारी
गन्ध से जानता हूँ।

मैं तुम्हें तुम्हारी
गन्ध से जानता हूँ

मैं तुम्हें तुम्हारी
सड़ी हुई लाश जैसी
दुर्गंध से जानता हूँ
लाश, जो एन केन प्रकारेण
चल रही है

पैसों से प्रेम के लिए।

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कुशाग्र अद्वैत
कुशाग्र अद्वैत बनारस में रहते हैं, इक्कीस बरस के हैं, कविताएँ लिखते हैं। इतिहास, मिथक और सिनेेमा में विशेष रुचि रखते हैं।अभी बनारस हिन्दू विश्विद्यालय से राजनीति विज्ञान में ऑनर्स कर रहे हैं।

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