‘Kaghaz Par Likhi Gayi Kavitaaon Mein’, a poem by Amar Dalpura

काग़ज़ पर लिखी गई कविताओं में
पेड़ों की त्वचा का दर्द लिखा जाता है

चुप्पी दो होंठों के बीच का शब्द नहीं
दो आँखों के मध्य निरन्तर सम्वाद है

प्रिये, तुम्हारे होंठ पर लिया गया चुम्बन
मेरी देह में थरथराता है

तुम पानी की सतह पर खड़ी रहती हो
तुम्हारे बिम्ब को ओक में भरने की कोशिश में
प्यास बढ़ जाती है

मैं जिस भाषा में तुम्हें प्रेम कर पाया
उस भाषा की लिपि
तय कर पाना मुश्किल है…

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