उस दौरान मैंने आठ से दस
अलग-अलग शहरों का पानी पी रखा था
और यह जाना था
कि एक लड़की अपने जीवन की सबसे सुन्दर कविताएँ प्लेटफ़ॉर्म पर लिख सकती है
बशर्ते, कोई पुरुष उसकी सुरक्षा के हवाले
उसे प्लेटफ़ॉर्म तक विदा करने ना आए!

हो सकता है मैं यहाँ अपने पिता की बात कर रही हूँ

मेरे पिता जब मुझे प्लेटफ़ॉर्म तक विदा करने आते थे
मैंने कई बार अपनी जगह
अपनी माँ की कल्पना की है

अगर मेरी माँ और उसके जैसी औरतों को
ट्रेनें पकड़नी होतीं
तो वे सब
प्लेटफ़ॉर्म पर अपना कविता संग्रह बना सकती थीं

हमारी माँओं के लिए प्रेम
प्लेटफ़ॉर्म से गुज़र चुकी वो ट्रेनें हैं
जिनकी टिकटें उनके नाम से कभी काटी नहीं गईं

तुम मुझे विदा करने नहीं आए थे
उसकी एवज़ में
मैंने कविता संग्रह बनाया है!

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पूजा शाह
पूजा शाह दिल्ली से हैं, दिल्ली विश्वविद्यालय से पोलिटिकल साइंस (ओनर्स) की पढ़ाई कर रहींं हैं!

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