फ़ैसला

मुक़दमे का पहला दिन
अभियुक्त पर
आरोपों के तय किए जाने का दिन था

दूसरा दिन
गवाहों के बयानों को दर्ज करने
और सबूतों की पड़ताल का था

मुक़दमे का तीसरा दिन
फ़ैसले का दिन था
जो तय हो चुका था
पहले दिन से भी पहले
अभियुक्त की
सामाजिक प्रतिष्ठा के अनुरूप।

सच

जब मैं
सच को हटाता हूँ दृश्य से
तो अनेकानेक
उपलब्ध विचारधाराओं में से
किसी भी विचारधारा की इमारत को
ढहता हुआ नहीं पाता
शायद अब
किसी भी नींव में
बाक़ी नहीं रहा सच

सच के गुज़र जाने पर
अब नहीं रखा जाता
कोई मौन
शोक सभाएँ नहीं होतीं
कुछ नहीं होता ऐसा
जिससे प्रकट किया जाता हो
किसी कमी को

एक चीज़
जो मैं देखता हूँ साफ़-साफ़
वो है
झूठ के चेहरे पर खिंचती हुई
मुस्कान की कुटिल लकीर
क्योंकि सत्य की मृत्यु के बाद
उसके सत्तारूढ़ हो जाने में
नहीं रह जाती
कोई भी अड़चन शेष।

बीमारी

कीलें कम पड़ रही हैं
जल्दी बन्द करो ताबूत
देखो, कहीं दफ़न करने से पहले
जाग न उठे
ताबूत में बन्द मन की
जीने की लालसा

बड़ी मुश्किल से मारा है
मैंने उसे
उसके जीते-जी
नहीं जी सकता था शरीर

वो एक असन्तुलित मन था
अपने प्रति पूरी तरह बेपरवाह
उसे अपनी रोटी
दूसरों में बाँट देने की
पैदाइशी बीमारी थी।

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