उन्हें मोहब्बत में जान देने वाली प्रेमिकाएँ पसन्द आयीं
औरतें जो चिता पर जल मरीं
उनके मन्दिर बने
प्रेमिकाएँ जो प्रेमियों के साथ भाग जाना चाहती थीं
उन्हें क़त्ल किया गया
पत्नियाँ जिन्होंने नपुंसक पति को त्यागा, वे बदचलन थीं

स्त्री ने पिता को प्रेम किया
यह जानते हुए भी
कि पिता ने गर्भ में उसकी मृत्यु की कामना की थी और उसके जन्म की सूचना को अशुभ की तरह ग्रहण किया
स्त्री ने भाई को प्रेम किया उसके चौड़े कंधों और बलशाली भुजाओं पर घमण्ड किया
यह जानते हुए भी कि
भाई ने उसके हिस्से की रोटी खायी
दूध पिया
उसके हिस्से का प्रेम पाया
झूठे प्रेम-पत्र किताबों में रखे
दहेज में चार पहिया देने की बात पर घर सिर पर उठाया, अंततः दो पहिया की हैसियत वाला वर ढूँढकर लाया

स्त्री ने पति को अधिक प्रेम किया
जबकि वह रात के अंधेरे में उसके नाम के अतिरिक्त जाने कितने नाम दोहराया करता
स्त्री ने पुत्र को प्रेम किया
जबकि उसने जन्मदात्री को बुद्धिहीन समझा, बात, लात, हाथ से चुप कराया

ज़िद्दी स्त्री ने मनपसन्द प्रेमी चुना
उसे प्रेम किया
वह तलवार की धार पर चलकर आती प्रेमी तक
वह चाहती कि ऐसी किसी कठिन राह से प्रेमी भी आएँ
पुरुष को सदा आसान चुनना था
प्रेमी हुए पुरुष के लिए पिता, पति, भाई होना सरल रहा
उसे डरी हुईं एहसानमन्द स्त्रियाँ पसन्द आयीं

प्रेमिका बाहुपाश में भी आज़ाद थी
स्त्री…! जो रोटी खिलाने वाली की न हुई, वह मेरी क्या होगी?
उसने बेस्वाद ज़िन्दगी का स्वाद बढ़ाने को प्रेम किया था
प्रेमिका फीकी दाल में हींग का तड़का थी
एकांत ऊँची पहाड़ी पर प्रेमिका को सहारा देकर चलाना
बन्द कमरे में माथे पर नेह का एक चुम्बन रखना
उसकी आँखों की गहराई में उतरते हुए ‘तुम्हारी नज़रों में हमने देखा…’ फ़िल्मी गाने की धुन दोहराना आसान था
प्रेमिका उसके हर कहे को सच मानती रही
जानकर भी मानती नहीं कि
तमाम याददाश्तों में सबसे आख़िर की याद है वह
पुरुष के लिए स्त्री रंगमंच है
और वह सूत्रधार
उसके शब्दकोश के तमाम पन्नों पर स्त्री केवल गौण रही और
प्रेम निरर्थक शब्द

स्त्रियाँ प्रेम में बादल हो सकती थीं
उन्होंने झील होना चुना
वे भरोसे की सान पर गर्दन धरे ज़िबह होती रहीं।
वे मर जाने से ठीक पहले
डायरी के आख़िरी पन्ने पर ‘इंतज़ार’ लिखती रहीं।

प्रतिभा राजेंद्र की कविता 'प्रेम में डूबी औरतें'

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प्रतिभा राजेन्द्र
निवासी: आजमगढ़, उत्तर प्रदेश कविताएँ प्रकाशित: जन सन्देश टाइम्स समाचार पत्र, सुबह सवेरे समाचार पत्र, सामयिक परिवेश पत्रिका, अदहन पत्रिका, स्त्री काल पत्रिका, स्त्री काल ब्लॉग, पुरवाई ब्लॉग स्वर्णवानी पत्रिका। अभिव्यक्ति के स्वर में लघुकथाएँ इंडिया ब्लॉग और प्रतिलिपि पर कहानियाँ प्रकाशित।ईमेल: [email protected]

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