Tag: Book review

Sushant Supriye - Daldal

क़िस्सागोई का कौतुक देती कहानियाँ

समीक्ष्य कृति: दलदल (कहानी संग्रह) (अंतिका प्रकाशन, ग़ाज़ियाबाद) टिप्पणी: सुषमा मुनीन्द्र 1सुपरिचित रचनाकार सुशांत सुप्रिय का सद्यः प्रकाशित कथा संग्रह ‘दलदल’ ऐसे समय में आया है...
Shimla Diary - Pramod Ranjan

प्रमोद रंजन की किताब ‘शिमला डायरी’ [समीक्षा: देविना अक्षयवर]

जिसे आज 'पहाड़ों की रानी' कहा जाता है, वह कभी उत्तरी भारत के इस हिमालयी राज्य का एक छोटा-सा गाँव हुआ करता था। अँग्रेज़ों...
Pratyancha - a book by Pankhuri Sinha

पंखुरी सिन्हा की किताब ‘प्रत्यंचा’

'कविता एक निर्णय है' किताब समीक्षा: पूनम सिन्हा किताब: 'प्रत्यंचा' (कविता संग्रह) कवयित्री: पंखुरी सिन्हा प्रकाशन: बोधि प्रकाशन "कविता न होगी साहस न होगा एक और ही युग होगा जिसमें...
Siyahat - Alok Ranjan

सियाह औ सुफ़ैद से कहीं अधिक है यह ‘सियाहत’

किताब समीक्षा: डॉ. श्रीश पाठक - आलोक रंजन की किताब 'सियाहत'आज की दुनिया, आज का समाज उतने में ही उठक-बैठक कर रहा जितनी मोहलत उसे...

उम्मीदों का अफ़साना – ‘बाहिर’

उम्मीदों का अफ़साना - 'बाहिर'(समीक्षा: प्रदुम्न आर. चौरे)"आते हैं राहों में मसाइब कई, यूँ ही नहीं होता करिश्मा कोई।"यह शेर मैंने पॉल ए कॉफ़मेन द्वारा...
Paanch Absurd Upanyas - Narendra Kohli

‘पांच एब्सर्ड उपन्यास’ – नरेन्द्र कोहली

'पांच एब्सर्ड उपन्यास' - नरेन्द्र कोहलीनरेन्द्र कोहली की किताब 'पाँच एब्सर्ड उपन्यास' पर आदित्य भूषण मिश्रा की टिप्पणी!मैंने जब किताब के ऊपर यह नाम...
kshama karna jiji - narendra kohli

नरेन्द्र कोहली की ‘क्षमा करना जीजी’

'क्षमा करना जीजी' - नरेन्द्र कोहलीआज सुबह "क्षमा करना जीजी" पढ़ना शुरू किया. यह नरेन्द्र कोहली लिखित सामाजिक उपन्यास है. यह अपने आप में...

‘पाकिस्तान का मतलब क्या’ – एक टिप्पणी

'पाकिस्तान का मतलब क्या' - एक टिप्पणीअसग़र वजाहत की किताब 'पाकिस्तान का मतलब क्या' पर आदित्य भूषण मिश्रा की एक टिप्पणीमैं अभी पिछले दिनों,...
aadhe adhoore mohan rakesh

‘आधे-अधूरे’: अपूर्ण महत्त्वाकांक्षाओं की कलह

'मोहन राकेश का नाटक आधे अधूरे' - यहाँ पढ़ें  मोहन राकेश का नाटक 'आधे-अधूरे' एक मध्यमवर्गीय परिवार की आंतरिक कलह और उलझते रिश्तों के साथ-साथ...
heera pheri surender mohan pathak

‘हीरा फेरी’ – सुरेन्द्र मोहन पाठक का इकसठ माल

जितना बड़ा नाम सुरेन्द्र मोहन पाठक हिन्दी के अपराध लेखन या पोपुलर साहित्य में रखते हैं, उस हिसाब से आज भी मुझे लगता है...
the night train at deoli - ruskin bond

The Night Train at Deoli – Ruskin Bond

बहुत अच्छे लेखकों के बारे में यह एक आम धारणा है कि उन्हें उनकी मूल भाषा में ही पढ़ा जाना चाहिए। रस्किन बॉन्ड, जिन्होंने...
Dharti Dhan Na Apna

जगदीश चंद्र की ‘धरती धन न अपना’

Book Review: 'Dharti Dhan Na Apna' - Jagdish Chandra'धरती धन न अपना' पंजाब के दोआबा क्षेत्र के दलितों की कहानी है जिसे लेखक ने...

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Couple in front of the ocean

एक दिन करेंगे बात केवल प्यार की

एक दिन करेंगे बात केवल प्यार की!तुम कहोगे—रुको तो मैं नहीं दिलाऊँगी याद कि आठ बज गये हैं चाँद चढ़ गया है लौट जाओ घर तुम कि तुम्हारे होने...
Nirmala Putul

आख़िर कहें तो किससे कहें

वे कौन लोग थे सिद्धो-कान्हू जो अँधेरे में सियार की तरह आए और उठा ले गए तुम्हारे हाथों से तीर-धनुष तुम्हारी मूर्ति तोड़ी वे कौन लोग थे, तुम...
Lee Min-yung - Haqeeqat ke beech daraar

ली मिन-युंग की कविताएँ

वरिष्ठ ताइवानी कवि ली मिन-युंग की कविताओं के हिन्दी अनुवाद का संकलन 'हक़ीक़त के बीच दरार' पिछले दिनों प्रकाशित हुआ। अनुवाद देवेश पथ सारिया...
Dunya Mikhail

दुन्या मिखाइल की कविता ‘दी इराक़ी नाइट्स’ के दो अंश

इराक़ी-अमेरिकी कवयित्री दुन्या मिखाइल का जन्म बग़दाद में हुआ था और उन्होंने बग़दाद विश्वविधालय से बी.ए. की डिग्री प्राप्त की। सद्दाम हुसैन के शत्रुओं...
Dunya Mikhail

दुन्या मिखाइल की कविता ‘मैं जल्दी में थी’

इराक़ी-अमेरिकी कवयित्री दुन्या मिखाइल का जन्म बग़दाद में हुआ था और उन्होंने बग़दाद विश्वविधालय से बी.ए. की डिग्री प्राप्त की। सद्दाम हुसैन के शत्रुओं...
Muktibodh

मलय के नाम मुक्तिबोध का पत्र

राजनाँद गाँव 30 अक्टूबर प्रिय मलयजीआपका पत्र यथासमय मिल गया था। पत्रों द्वारा आपके काव्य का विवेचन करना सम्भव होते हुए भी मेरे लिए स्वाभाविक नहीं...
People, Society, Faces

वे लोकतंत्र को कम जानते थे

वे बहुत पढ़ी-लिखी नहीं थीं ताइवान में काम मिलने की ख़बर उन्हें सुना उनके पैर छू रहा था जब मैं मुझे आशीर्वाद देते हुए उन्होंने कहा— "बेटा सम्भलकर...
Dwarka Bharti

द्वारका भारती की कविताएँ

द्वारका भारती पंजाबी भाषा के सुपरिचित कवि, लेखक व उपन्यासकार हैं और पिछले कई सालों से पंजाबी दलित साहित्य आन्दोलन का नेतृत्व कर रहे...
Hetu Bhardwaj

छिपाने को छिपा जाता

कल रात मेरे कॉलेज के छात्रों ने मुझे पीट दिया। यों मेरी पिटाई तो ज़्यादा नहीं हुई, लेकिन ज़्यादा हो जाती, शौहरत तब भी...
Yogesh Dhyani

साँझ होती है ठीक उसी की तरह सुन्दर

अँधेरे को कुचलते हुए उदय होता है सूर्य, अँधेरा होता है अस्त सूरज को कोसते हुएदोपहर हमारी खिड़कियों से हमारे भीतर दाख़िल होने की कोशिश में रहती हैधूप...
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