Tag: Gopaldas Neeraj

Gopaldas Neeraj

प्रेम-पथ हो न सूना

प्रेम-पथ हो न सूना कभी, इसलिए जिस जगह मैं थकूँ, उस जगह तुम चलो।क़ब्र-सी मौन धरती पड़ी पाँव पर शीश पर है कफ़न-सा घिरा आसमाँ, मौत की...
Gopaldas Neeraj

कारवाँ गुज़र गया

स्वप्न झरे फूल से मीत चुभे शूल से लुट गए सिंगार सभी बाग़ के बबूल से और हम खड़े-खड़े बहार देखते रहे कारवाँ गुज़र गया, ग़ुबार देखते रहे!नींद भी...
Gopaldas Neeraj

दुःख ने दरवाज़ा खोल दिया

मैंने तो चाहा बहुत कि अपने घर में रहूँ अकेला, पर— सुख ने दरवाज़ा बन्द किया, दुःख ने दरवाज़ा खोल दिया।मन पर तन की साँकल...
Gopaldas Neeraj

प्यार की कहानी चाहिए

आदमी को आदमी बनाने के लिए ज़िन्दगी में प्यार की कहानी चाहिए और कहने के लिए कहानी प्यार की स्याही नहीं, आँखों वाला पानी चाहिए।जो भी कुछ...
Gopaldas Neeraj

आदमी को प्यार दो

सूनी-सूनी ज़िन्दगी की राह है भटकी-भटकी हर नज़र-निगाह है राह को सँवार दो निगाह को निखार दो आदमी हो तुम कि उठो, आदमी को प्यार दो। दुलार दो। रोते हुए...

धनिकों के तो धन हैं लाखों

धनिकों के तो धन हैं लाखों मुझ निर्धन के धन बस तुम हो!कोई पहने माणिक माल कोई लाल जुड़ावे कोई रचे महावर मेहँदी मुतियन माँग भरावेसोने वाले, चाँदी वाले पानी...
Gopaldas Neeraj

विश्व चाहे या न चाहे

विश्व चाहे या न चाहे, लोग समझें या न समझें, आ गए हैं हम यहाँ तो गीत गाकर ही उठेंगे।हर नज़र ग़मगीन है, हर होठ ने...
Gopaldas Neeraj

मुझको याद किया जाएगा

'Mujhko Yaad Kiya Jaega', a poem by Gopaldas Neerajआँसू जब सम्मानित होंगे, मुझको याद किया जाएगा जहाँ प्रेम का चर्चा होगा, मेरा नाम लिया जाएगा।मान-पत्र...
Gopaldas Neeraj

इसीलिए तो नगर-नगर

'Isiliye Toh Nagar Nagar', a poem by Gopaldas Neerajइसीलिए तो नगर-नगर बदनाम हो गए मेरे आँसू मैं उनका हो गया कि जिनका कोई पहरेदार नहीं था।जिनका...
Gopaldas Neeraj

जितना कम सामान रहेगा

'Jitna Kam Saman Rahega', a poem by Gopaldas Neerajजितना कम सामान रहेगा उतना सफ़र आसान रहेगाजितनी भारी गठरी होगी उतना तू हैरान रहेगाउससे मिलना नामुमकिन है जब तक...
Gopaldas Neeraj

छिप-छिप अश्रु बहाने वालों

छिप-छिप अश्रु बहाने वालों, मोती व्यर्थ बहाने वालों कुछ सपनों के मर जाने से, जीवन नहीं मरा करता है। सपना क्या है, नयन सेज पर सोया हुआ...
Gopaldas Neeraj

धर्म है

जिन मुश्किलों में मुस्कुराना हो मना, उन मुश्किलों में मुस्कुराना धर्म है। जिस वक़्त जीना ग़ैर मुमकिन सा लगे, उस वक़्त जीना फ़र्ज़ है इंसान का, लाज़िम लहर के साथ...

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‘एक देश बारह दुनिया’ : हाशिए पर छूटे भारत की तस्वीर

पुस्तक: 'एक देश बारह दुनिया : हाशिए पर छूटे भारत की तस्वीर' लेखक: शिरीष खरे प्रकाशक: राजपाल एण्ड संससमीक्षा/टिप्पणी: आलोक कुमार मिश्रासंविधान में लिखा है— 'इंडिया...
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'भाषायी असमानता को हमारे शिक्षण-संस्थान जन्म दे रहे हैं' : प्रमोद रंजन से पंकज पुष्कर की बातचीत पंकज पुष्कर: जन्म से लेकर अब तक आपकी...
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समीक्षा: ‘एक बटा दो’

किताब: 'एक बटा दो' लेखिका: सुजाता प्रकाशक: राजकमल प्रकाशनसमीक्षा/टिप्पणी: महेश कुमार स्त्री निर्मिति की विभिन्न चरणों की पड़ताल करके उससे बाहर निकलने का स्त्रीवादी विश्लेषण है 'एक...
Vijendra

कवि

मेरे लिए कविता रचने का कोई ख़ास क्षण नहीं। मैं कोई गौरय्या नहीं जो सूर्योदय और सूर्यास्त पर घौंसले के लिए चहचहाना शुरू कर दूँ।समय ही ऐसा है कि मैं...
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