Tag: Hatred

Agyeya

घृणा का गान

सुनो, तुम्हें ललकार रहा हूँ, सुनो घृणा का गान!तुम, जो भाई को अछूत कह वस्त्र बचाकर भागे तुम, जो बहिनें छोड़ बिलखती, बढ़े जा रहे...
Saadat Hasan Manto

वह लड़की

सवा चार बज चुके थे लेकिन धूप में वही तमाज़त थी जो दोपहर को बारह बजे के क़रीब थी। उसने बालकनी में आकर बाहर...
Gulzar

दस्तक

सुबह-सुबह इक ख़्वाब की दस्तक पर दरवाज़ा खोला, देखा सरहद के उस पार से कुछ मेहमान आए हैं आँखों से मानूस थे सारे चेहरे सारे सुने-सुनाए पाँव धोए,...
Markandeya

ग़रीबों की बस्ती

यह है कलकत्ता का बहूबाज़ार, जिसके एक ओर सरकारी अफ़सरों तथा महाजनों के विशाल भवन हैं और दूसरी ओर पीछे उसी अटपट सड़क के...
Little Girl laughing, Kid

नन्ही बच्चियाँ

'Nanhi Bachchiyaan', a poem by Nirmal Guptदो नन्ही बच्चियाँ घर की चौखट पर बैठीं पत्थर उछालती, खेलती हैं कोई खेल वे कहती हैं इसे- गिट्टक! इसमें न...
War, Blood, Mob, Riots

गाँव-देश

'Gaon Desh', a story by Amit Tiwaryजब से रामा बाबा फ़ौज से रिटायर हुए थे, यानि कि लगभग बीस साल पहले, तब से गाँव...
Harshita Panchariya

विषतंत्र

'Vishtantra', a poem by Harshita Panchariyaअपने तंत्र को मज़बूत करने के लिए उन्होंने चुना साँपों को, तालाब में मछलियों की संख्या अधिक होने के बावजूद दानों की लड़ाई...
Fire, Riots, Curfew

आग

'Aag', a poem by Poonam Sonchhatraआग... बेहद शक्तिशाली है जला सकती है शहर के शहर फूँक सकती है जंगल के जंगलआग... नहीं जानती सजीव-निर्जीव का भेदवह नहीं...
Smoke

सियासत

'Siyasat', a poem by Shekhar Azamgarhiवादों की सिगरेट जलाकर बहुमत का धुआँ उड़ा मुद्दों की राख उड़ाता चला नफ़रत के निकोटिन का आदीफेफड़े में झूठ जैसे क्षयरोग खाँसता,...
Religion, Religious, Hands, Hell

साक्ष्य

'Saakshya', a poem by Harshita Panchariyaजाते-जाते उसने कहा था, नरभक्षी जानवर हो सकते हैं पर मनुष्य कदापि नहीं,जानवर और मनुष्य में चार पैर और पूँछ के सिवा समय...
Gorakh Pandey

दंगा

'Danga', poems by Gorakh Pandey1आओ भाई बेचू, आओ आओ भाई अशरफ़, आओ मिल-जुल करके छुरा चलाओ मालिक रोज़गार देता है पेट काट-काटकर छुरा मँगाओ फिर मालिक की दुआ मनाओ अपना-अपना धरम...
Swayam Prakash

पार्टीशन

"आप क्या खाक हिस्ट्री पढ़ाते हैं? कह रहे हैं पार्टीशन हुआ था! हुआ था नहीं, हो रहा है, जारी है..."

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दुन्या मिखाइल की कविता ‘चित्रकार बच्चा’

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Muktibodh - T S Eliot

टी. एस. ईलियट के प्रति

पढ़ रहा था कल तुम्हारे काव्य कोऔर मेरे बिस्तरे के पास नीरव टिमटिमाते दीप के नीचे अँधेरे में घिरे भोले अँधेरे में घिरे सारे सुझाव, गहनतम संकेत! जाने...
Jeffrey McDaniel

जेफ़री मैकडैनियल की कविता ‘चुपचाप संसार’

जेफ़री मैकडैनियल (Jeffrey McDaniel) के पाँच कविता संग्रह आ चुके हैं, जिनमें से सबसे ताज़ा है 'चैपल ऑफ़ इनडवर्टेंट जॉय' (यूनिवर्सिटी ऑफ़ पिट्सबर्ग प्रेस,...
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