Tag: Poonam Sonchhatra

Poonam Sonchhatra

अपराध बोध

'Apradh Bodh', a poem by Poonam Sonchhatraवक़्त बीत जाने पर मिलने वाला प्रेम नहीं रह पाता उस गुलाब की कली के जैसा जिसे बड़े जतन से जीवन...
Poonam Sonchhatra

छज्जे पर टँगा प्रेम

'Chhajje Par Tanga Prem', a poem by Poonam Sonchhatraटाँग रक्खे हैं बहुत से सुख-दुःख हमने छज्जे परकुछ बातें केवल इसलिए होती हैं कि उन्हें छज्जे पर...
Poonam Sonchhatra

नौकरीपेशा औरतें

'Naukripesha Auratein', a poem by Poonam Sonchhatraकाफ़ी कुछ कहा जाता है इनके बारे में उड़ने की चाह लिए पैर घुटनों तक ज़मीन में गड़ाए दोहरी ज़िंदगी जीने...
Poonam Sonchhatra

मेरे हिस्से का इतवार

'Mere Hisse Ka Itwaar', a poem by Poonam Sonchhatraकोई किताब उठायी दो-चार सफ़्हे उलट-पलट कर रख दिएटीवी पर चल रही फ़िल्म देखते-देखते कुछ ही पलों में, मैं...
Poonam Sonchhatra

बेटी की माँ

'Beti Ki Maa', a poem by Poonam Sonchhatraहम चार बहनें हैं हाँ हाँ और एक भाई भी है सही समझा आपने भाई सबसे छोटा हैलेकिन हम बहनें सौभाग्यशाली रहीं क्योंकि...
Poonam Sonchhatra

रौशनी

'Raushni', a poem by Poonam Sonchhatraये समय ये कठिन समय रात्रि के अन्तिम पहर का है जब निशा ने अपनी गहनतम चादर से पूरे संसार को ढक रखा है.. मैं सभी...
Poonam Sonchhatra

छोटी कहानियाँ

'Chhoti Kahaniyan', a poem by Poonam Sonchhatraकुछ कहानियाँ छोटी होती हैं बेहद छोटी...जिनमें एक तितली उड़ने के पहले ही अपने रंग खो देती है और मुट्ठी में मसल...

मेरे पिता

कहते हैं बेटियाँ पिता को ज़्यादा प्यारी होती हैं...बचपन से ही देखती आ रही हूँ और आज भी जब अपनी नन्हीं बिटिया को उसके पिता के कंधो पर...

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