Tag: Silence
मेरा मौन, तुम्हारा गुस्सा
आज उसने फिर मुझसे बात करने की कोशिश की-
"कोई कहानी? कोई कविता?
कभी कुछ भी तो नहीं होता तुम्हारे पास,
मुझे कहने को!"
फिर वो झल्लाई, खूब...
कविता में मौन
मैंने लिखे
खण्डर बनते क़िले,
युद्ध का यलग़ार,
तलवारों की चमक,
सभ्यताओं के विनाश
के बारे में लिखा,
और रात के सन्नाटे में
सुनाई दी
एक टिटहरी की चीख़
परमाणु बम की विभीषिकाओं
और
जलते...
रात का अपनापन
जब सब कुछ चुप हो, निःशब्द
तब का शोर सबसे तीव्र होता है।
बारिश की आखिरी बूँद का धीरे से भी
ज़मीन पर पैर रखना सुनाई दे...
कल रात
देखता था स्वप्न जिसको सिरहाने सजाकर
ढाप लेता था जिसे चादर बनाकर
हर जो लेती थी थकावट मास भर की
बन जो जाती थी नियति उस पहर...
उदासीन गीत
मैंने एक उदासीन गीत लिखना चाहा है,
तुम पढ़ोगे? तुम कहोगे, "गीत तो अनुराग भरा भी लिख सकती थी तुम...",
तो मैं कहूंगी, "हाँ लिख तो...


