Tag: Silence

Abstract, Head, Human

शिवम तोमर की कविताएँ

रोटी की गुणवत्ता जिस गाय को अम्मा खिलाती रहीं रोटियाँ और उसका माथा छूकर माँगती रहीं स्वर्ग में जगह अब घर के सामने आकर रम्भियाती रहती है अम्मा ने तो खटिया...
Silent, Quiet, Silence, Woman, Shut, Do not speak, Taboo

मौन का वजूद

हर काल में मौन को किया गया परिभाषित अपने तरीक़े से अपनी सुविधानुसार।मौन को कभी ओढ़ा दिया गया लाज का घूँघट, कभी पहना दिया स्वीकृति का जामा।पलटकर बोलने वाली स्त्रियों को दी गयी उपाधि बेहया...
Raghuvir Sahay

मौन

'स्थगित कर दूँ क्या अभी अभिव्यक्ति का आग्रह, न बोलूँ, चुप रहूँ क्या?' क्यों? कहिए, न बोलूँ, चुप रहूँ क्या? किंतु आप कहें कि 'धन्यवाद,...
Tribe, Village, Adivasi, Labour, Tribal, Poor

राकेश मिश्र की कविताएँ

सन्नाटा हवावों का सनन् सनन् ऊँग ऊँग शोर दरअसल एक डरावने सन्नाटे का शोर होता है, ढेरों कुसिर्यों के बीच बैठा अकेला आदमी झुण्ड से बिछड़ा अकेला पशु आसानी से महसूस कर सकता...
Nirmal Gupt

चुप रहो

चुप रहो चुपचाप सहोसमझ जाओ जो चुप रहेंगे वे बचेंगे बोलने वालों को सिर में गोली के ज़रिये सुराख़ बनाकर मार डाला जाएगा ख़ामोश रहने वालों को क़रीने...
Arun Kamal

तुम चुप क्यों हो

क्या है गुप्त क्या है व्यक्तिगत जब गर्भ में बन्द बच्चा भी इतना खुला है इतना प्रत्यक्ष?कोई अपनी पत्नी को पीट रहा है बेतहाशा कहता है— मेरी औरत है कोई...
Adarsh Bhushan

मौन

हथेलियों पर बिखरा मेरी, तुम्हारी हथेलियों का स्पर्श, हमारे बीच के मौन का सम्वाद हैजैसे गोधूलि और साँझ के बीच आकाश मौन होता है प्रकृति का सम्वाद मनुष्य से उसके आध्यात्म के अनन्त के पार अपनी अप्रतिम...
Silence

चुप्पी

'Chuppi', a poem by Bhupendra Singh Khidiaबातें लिखने में नहीं आतीं समझाने में नहीं आतीं कभी गर खींच पाए ग़लती से भी पटरियाँ ये मन तब भी वहाँ...
Harshita Panchariya

शब्द और मौन

'Shabd Aur Maun', Short Hindi Poems by Harshita Panchariyaबचाकर रखिए अपने शब्दों को इसलिए नहीं कि शब्दों के हाथ-पैर नहीं होते बल्कि इसलिए कि शब्दों से लम्बी लोगों की...
Yellow Flower, Offering, Sorry, Apology

मौन

मेरा मौन मेरे मौन का अनुवाद करना, स्मृतियों को तुम आकार देना दैहिकता से आगे बढ़ फिर मुझको गढ़ना। आलिगंन की ऊष्मा का, ताप बिखेर देना मेरे सीने में जहाँ सुस्त पड़ी है सदियों...
Mudit Shrivastava

चुप्पियाँ

दो चुप्पियाँ एक दिन, एक दूसरे से ग़ुस्सा हो गयीं दोनों एक कमरे के दो कोनों में अपने घुटने मोड़कर बैठी रहीं, आपस में ऐंठी रहींआपस में दोनों के दूरी ज़्यादा...

मेरा मौन, तुम्हारा गुस्सा

आज उसने फिर मुझसे बात करने की कोशिश की- "कोई कहानी? कोई कविता? कभी कुछ भी तो नहीं होता तुम्हारे पास, मुझे कहने को!" फिर वो झल्लाई, खूब...

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Man holding train handle

आधुनिकता

मैं इक्कीसवीं सदी की आधुनिक सभ्यता का आदमी हूँ जो बर्बरता और जंगल पीछे छोड़ आया हैमैं सभ्य समाज में बेचता हूँ अपना सस्ता श्रम और दो वक़्त की...
Justyna Bargielska

यूस्टीना बारगिल्स्का की कविताएँ

1977 में जन्मीं, पोलिश कवयित्री व उपन्यासकार यूस्टीना बारगिल्स्का (Justyna Bargielska) के अब तक सात कविता संग्रह प्रकाशित हो चुके हैं और उन्हें दो...
Saadat Hasan Manto

ख़ुशिया

ख़ुशिया सोच रहा था।बनवारी से काले तम्बाकूवाला पान लेकर वह उसकी दुकान के साथ लगे उस संगीन चबूतरे पर बैठा था जो दिन के...
Naresh Mehta

घर की ओर

वह— जिसकी पीठ हमारी ओर है अपने घर की ओर मुँह किये जा रहा है जाने दो उसे अपने घर।हमारी ओर उसकी पीठ— ठीक ही तो है मुँह यदि होता तो...
Upma Richa

या देवी

1सृष्टि की अतल आँखों में फिर उतरा है शक्ति का अनंत राग धूम्र गंध के आवक स्वप्न रचती फिर लौट आयी है देवी रंग और ध्वनि का निरंजन...
Chen Kun Lun

चेन कुन लुन की कविताएँ

चेन कुन लुन का जन्म दक्षिणी ताइवान के काओशोंग शहर में सन 1952 में हुआ। वह एक सुधी सम्पादक रहे हैं। चेन लिटरेरी ताइवान...
Bharat Ke Pradhanmantri - Rasheed Kidwai

किताब अंश: भारत के प्रधानमंत्री

सुपरिचित पत्रकार और राजनीतिक विश्लेषक रशीद किदवई की किताब 'भारत के प्रधानमंत्री : देश, दशा, दिशा' भारत के पहले प्रधानमंत्री से लेकर वर्तमान प्रधानमंत्री...
Muktibodh - Premchand

मेरी माँ ने मुझे प्रेमचन्द का भक्त बनाया

एक छाया-चित्र है। प्रेमचन्द और प्रसाद दोनों खड़े हैं। प्रसाद गम्भीर सस्मित। प्रेमचन्द के होंठों पर अस्फुट हास्य। विभिन्न विचित्र प्रकृति के दो धुरन्धर...
Manish Kumar Yadav

लगभग विशेषण हो चुका शासक

किसी अटपटी भाषा में दिए जा रहे हैं हत्याओं के लिए तर्क'एक अहिंसा है जिसका सिक्का लिए गांधीजी हर शहर में खड़े हैं लेकिन जब भी सिक्का उछालते...
Village, Farmer

किसान को कौन जानता है?

हवा को जितना जानता है पानी कोई नहीं जानतापानी को जितना जानती है आग कोई नहीं जानताआग को जितना जानते हैं पेड़ कोई नहीं जानतापेड़ को जितना...
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