Tag: Silence

Raghuvir Sahay

मौन

'स्थगित कर दूँ क्या अभी अभिव्यक्ति का आग्रह, न बोलूँ, चुप रहूँ क्या?' क्यों? कहिए, न बोलूँ, चुप रहूँ क्या? किंतु आप कहें कि 'धन्यवाद,...
Tribe, Village, Adivasi, Labour, Tribal, Poor

राकेश मिश्र की कविताएँ

सन्नाटा हवावों का सनन् सनन् ऊँग ऊँग शोर दरअसल एक डरावने सन्नाटे का शोर होता है, ढेरों कुसिर्यों के बीच बैठा अकेला आदमी झुण्ड से बिछड़ा अकेला पशु आसानी से महसूस कर सकता...
Nirmal Gupt

चुप रहो

चुप रहो चुपचाप सहो समझ जाओ जो चुप रहेंगे वे बचेंगे बोलने वालों को सिर में गोली के ज़रिये सुराख़ बनाकर मार डाला जाएगा ख़ामोश रहने वालों को क़रीने...
Arun Kamal

तुम चुप क्यों हो

क्या है गुप्त क्या है व्यक्तिगत जब गर्भ में बन्द बच्चा भी इतना खुला है इतना प्रत्यक्ष? कोई अपनी पत्नी को पीट रहा है बेतहाशा कहता है— मेरी औरत है कोई...
Adarsh Bhushan

मौन

हथेलियों पर बिखरा मेरी, तुम्हारी हथेलियों का स्पर्श, हमारे बीच के मौन का सम्वाद है जैसे गोधूलि और साँझ के बीच आकाश मौन होता है प्रकृति का सम्वाद मनुष्य से उसके आध्यात्म के अनन्त के पार अपनी अप्रतिम...
Silence

चुप्पी

'Chuppi', a poem by Bhupendra Singh Khidia बातें लिखने में नहीं आतीं समझाने में नहीं आतीं कभी गर खींच पाए ग़लती से भी पटरियाँ ये मन तब भी वहाँ...
Harshita Panchariya

शब्द और मौन

'Shabd Aur Maun', Short Hindi Poems by Harshita Panchariya बचाकर रखिए अपने शब्दों को इसलिए नहीं कि शब्दों के हाथ-पैर नहीं होते बल्कि इसलिए कि शब्दों से लम्बी लोगों की...
Yellow Flower, Offering, Sorry, Apology

मौन

मेरा मौन मेरे मौन का अनुवाद करना, स्मृतियों को तुम आकार देना दैहिकता से आगे बढ़ फिर मुझको गढ़ना। आलिगंन की ऊष्मा का, ताप बिखेर देना मेरे सीने में जहाँ सुस्त पड़ी है सदियों...
Mudit Shrivastava

चुप्पियाँ

दो चुप्पियाँ एक दिन, एक दूसरे से ग़ुस्सा हो गयीं दोनों एक कमरे के दो कोनों में अपने घुटने मोड़कर बैठी रहीं, आपस में ऐंठी रहीं आपस में दोनों के दूरी ज़्यादा...

मेरा मौन, तुम्हारा गुस्सा

आज उसने फिर मुझसे बात करने की कोशिश की- "कोई कहानी? कोई कविता? कभी कुछ भी तो नहीं होता तुम्हारे पास, मुझे कहने को!" फिर वो झल्लाई, खूब...
Nishant

कविता में मौन

मैंने लिखे खण्डर बनते क़िले, युद्ध का यलग़ार, तलवारों की चमक, सभ्यताओं के विनाश के बारे में लिखा, और रात के सन्नाटे में सुनाई दी एक टिटहरी की चीख़ परमाणु बम की विभीषिकाओं और जलते...
Clock, Watch, Time, Dark

रात का अपनापन

जब सब कुछ चुप हो, निःशब्द तब का शोर सबसे तीव्र होता है। बारिश की आखिरी बूँद का धीरे से भी ज़मीन पर पैर रखना सुनाई दे...

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Kunwar Narayan

अबकी अगर लौटा तो

अबकी अगर लौटा तो बृहत्तर लौटूँगा चेहरे पर लगाए नोकदार मूँछें नहीं कमर में बाँधे लोहे की पूँछें नहीं जगह दूँगा साथ चल रहे लोगों को तरेरकर न देखूँगा...
Poonachi - Perumal Murugan

पेरुमल मुरुगन – ‘पूनाची’

पेरुमल मुरुगन के उपन्यास 'पूनाची' से उद्धरण | Quotes by Perumal Murugan from 'Poonachi'   "मैं इंसानों के बारे में लिखने के प्रति आशंकित रहता हूँ;...
Leeladhar Jagudi

अपने अन्दर से बाहर आ जाओ

हर चीज़ यहाँ किसी न किसी के अन्दर है हर भीतर जैसे बाहर के अन्दर है फैलकर भी सारा का सारा बाहर ब्रह्माण्ड के अन्दर है बाहर सुन्दर...
Dhoomil

पटकथा

जब मैं बाहर आया मेरे हाथों में एक कविता थी और दिमाग़ में आँतों का एक्स-रे। वह काला धब्बा कल तक एक शब्द था; ख़ून के अँधेर में दवा का ट्रेडमार्क बन गया...
Venu Gopal

मेरा वर्तमान

मैं फूल नहीं हो सका। बग़ीचों से घिरे रहने के बावजूद। उनकी हक़ीक़त जान लेने के बाद यह मुमकिन भी नहीं था। यों अनगिन फूल हैं वहाँ। लेकिन मुस्कुराता हुआ...
Kedarnath Agarwal

हमारी ज़िन्दगी

हमारी ज़िन्दगी के दिन, बड़े संघर्ष के दिन हैं। हमेशा काम करते हैं, मगर कम दाम मिलते हैं। प्रतिक्षण हम बुरे शासन, बुरे शोषण से पिसते हैं। अपढ़, अज्ञान, अधिकारों से वंचित...
Mannu Bhandari

सयानी बुआ

सब पर मानो बुआजी का व्यक्तित्व हावी है। सारा काम वहाँ इतनी व्यवस्था से होता जैसे सब मशीनें हों, जो क़ायदे में बँधीं, बिना...
Javed Akhtar

एक मोहरे का सफ़र

जब वो कम-उम्र ही था उसने ये जान लिया था कि अगर जीना है बड़ी चालाकी से जीना होगा आँख की आख़िरी हद तक है बिसात-ए-हस्ती और वो...
Kishwar Naheed

ग्लास लैंडस्केप

अभी सर्दी पोरों की पहचान के मौसम में है इससे पहले कि बर्फ़ मेरे दरवाज़े के आगे दीवार बन जाए तुम क़हवे की प्याली से उठती...
Paash

भारत

भारत— मेरे सम्मान का सबसे महान शब्द जहाँ कहीं भी प्रयोग किया जाए बाक़ी सभी शब्द अर्थहीन हो जाते हैं इस शब्द के अर्थ खेतों के उन बेटों में...
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