शब्द और मौन

‘Shabd Aur Maun’, Short Hindi Poems by Harshita Panchariya

बचाकर रखिए अपने शब्दों को
इसलिए नहीं कि
शब्दों के हाथ-पैर नहीं होते
बल्कि इसलिए
कि शब्दों से
लम्बी लोगों की ज़ुबान
और कच्चे कान
शब्दों से ‘हल्के’ होते है

***

मौन की मार ने
कितनी ही आत्माओं
को नंगा किया है
शब्दों को बचाकर रखना
अहिंसा का पर्याय ही तो है

***

मेरी स्मृति में तुम्हारे शब्दों ने
अधिक जगह घेरी
और तुम्हारे हृदय में
मेरे मौन ने
शब्दों की अधिकता के
बावजूद मौन की रिक्तता
भारी है

***

मैंने जब मौन सीखा
तो अलभ्य कहलायी
मैंने जब शब्द सीखे
तो सभ्य कहलायी
मौन से शब्दों तक की
यात्रा में जन्मी
कितनी असभ्यता
यह भाषा का कटु अनुभव था

***

शब्द मूढ़ है
मौन गूढ़ है!