‘Usne Kaha’, a poem by Rohit Thakur

उसने कहा सुख जल्दी थक जाता है
और दुःख एक पैसेंजर ट्रेन की तरह है

उसने सबसे अधिक गालियाँ
अपने आप को दीं

उसका झगड़ा पड़ोस से नहीं
उस आकाश से है जो
तारों को आत्महत्या के लिए उकसाता है

उसने सबसे डरा हुआ आदमी
उस पुलिस वाले को माना
जो गोली मार देना चाहता है सबको

वह चाहता है कि एक
घुआँ का पर्दा टंगा रहे
हर अच्छी और बुरी चीज़ों के बीच
ताकि औरतों और बच्चों के सपनों पर
चाकू के निशान न हों।

यह भी पढ़ें: रोहित ठाकुर की कविता ‘एक जाता हुआ आदमी’

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रोहित ठाकुर
जन्म तिथि - 06/12/1978; शैक्षणिक योग्यता - परा-स्नातक राजनीति विज्ञान; निवास: पटना, बिहार | विभिन्न प्रतिष्ठित साहित्यिक पत्र पत्रिकाओं बया, हंस, वागर्थ, पूर्वग्रह ,दोआबा , तद्भव, कथादेश, आजकल, मधुमती आदि में कविताएँ प्रकाशित | विभिन्न प्रतिष्ठित समाचार-पत्रों - हिन्दुस्तान, प्रभात खबर, अमर उजाला आदि में कविताएँ प्रकाशित | 50 से अधिक ब्लॉगों पर कविताएँ प्रकाशित | कविताओं का मराठी और पंजाबी भाषा में अनुवाद प्रकाशित।

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