Tag: Rohit Thakur

Rohit Thakur

बहन

1 जीवन में स्वयं के पराजय का दुःख उतना कभी नहीं रहा जितना कभी बहन के उदास चेहरे को देखने-भर से हुआ मैं उन सभी आन्दोलनों में शामिल...
Rohit Thakur

सोलेस इन मे

कौन आएगा मई में सांत्वना देने कोई नहीं आएगा समय ने मृत्यु का स्वांग रचा है अगर कोई न आए तो बारिश तुम आना आँसुओं की तरह दो-चार बूँदों की...
Rohit Thakur

भाषा के पहाड़ के उस पार

कितने लोग ख़ाली हाथ घर लौटते हैं इस धरती पर कितना तूफ़ान मचा रहता है उनके अंदर किसी देश का मौसम विभाग इस तूफ़ान की सूचना नहीं देता हैएक थके...
Rohit Thakur

एक मौसम को लिखते समय

मैं सही शब्दों की तलाश करूँगा लिखूँगा एक मौसम, एक सत्य कहने में दुःख का वृक्ष भी सूख जाता हैघर जाने वाली सभी रेल विलम्ब से चल रही...
Rohit Thakur

मेरे पढ़ने की प्राथमिकता में दोष है

मैंने उन लेखकों को पढ़ना चाहा जो उन देशों में रहते थे जिनकी दिशा का ज्ञान मुझे नहीं है उन तमाम लेखकों के बारे में मैं कितना...
Rohit Thakur

मैं अपने मरने के सौन्दर्य को चूक गया

एक औरत मुजफ़्फ़रपुर जंक्शन के प्लेटफ़ार्म पर मरी लेटी है उसका बच्चा उसके पास खेल रहा है बच्चे की उम्र महज़ एक साल हैएक औरत की गोद में...
Rohit Thakur

हम सब लौट रहे हैं

हम सब लौट रहे हैं ख़ाली हाथ भय और दुःख के साथ लौट रहे हैं हमारे दिलो-दिमाग़ में गहरे भाव हैं पराजय के इत्मीनान से आते समय अपने कमरे को भी...
Rohit Thakur

कविताएँ — मई 2020 (दूसरा भाग)

मैना निष्ठुर दिनों में देखा है कोई नहीं आता। मैना की ही बात करता हूँ कई मौसमों के बीत जाने पर आयी है मैं तो बच गया— विस्मृत हो रही...
Rohit Thakur

कविताएँ – मई 2020

गौरैया गौरैया को देखकर कौन चिड़िया मात्र को याद करता है? गौरैया की चंचलता देखकर बेटी की चंचल आँखें याद आती हैं, पत्नी को देखता हूँ रसोई में हलकान गौरैया...
Rohit Thakur

नदी

नदी : नौ कविताएँ1नदी को देखना नदी को जानना नहीं है नदी को छूना नदी को पाना नहीं है नदी के साथ सम्वाद नदी की तरह भीगना नहीं है नदी...
Rohit Thakur

घटना नहीं है घर लौटना

रोहित ठाकुर : तीन कविताएँ घर लौटते हुए किसी अनहोनी का शिकार न हो जाऊँ दिल्ली - बम्बई - पूना - कलकत्ता न जाने कहाँ-कहाँ से पैदल चलते...
Rohit Thakur

घर

'Ghar', a poem by Rohit Thakurकहीं भी घर जोड़ लेंगे हम बस ऊष्णता बची रहे घर के कोने में बची रहे धूप चावल और आटा बचा रहे ज़रूरत-भर के...

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