सुख एक ख़ूबसूरत परिकल्पना है
जीवन, कम और अधिक दुःख के मध्य
चयन की जद्दोजहद!

मार्ग के द्वंद में फँसे,
नियति को देते हैं हम
मन्नतों की रिश्वतें
देवता मनुष्यों के समक्ष निर्बल हैं
अधूरी मन्नतें देवों की आत्मा पर बोझ।

बोझ के भार से अनझिप जगता है ईश्वर
उसे असमय पुकारते हम नहीं जानते
यातना और मृत्यु के मध्य की साँठ-गाँठ।

यातना की विजय पर दूर खड़ी
हँसती है मृत्यु,
साथ ले जाते हुए नहीं भूलती
चुन लेना यातना का वारिस।

सलीब के रेशों पर लिखी गई हैं
तमाम वसीयतें।

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डॉ. निधि अग्रवाल
डॉ. निधि अग्रवाल पेशे से चिकित्सक हैं। लमही, दोआबा,मुक्तांचल, परिकथा,अभिनव इमरोज आदि साहित्यिक पत्रिकाओं व आकाशवाणी छतरपुर के आकाशवाणी केंद्र के कार्यक्रमों में उनकी कहानियां व कविताएँ , विगत दो वर्षों से निरन्तर प्रकाशित व प्रसारित हो रहीं हैं। प्रथम कहानी संग्रह 'फैंटम लिंब' (प्रकाशाधीन) जल्द ही पाठकों की प्रतिक्रिया हेतु उपलब्ध होगा।

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