Tag: Pain

Man, Sad, Black, Abstract, Grief

दोपहर का भोजन

दुःख दुःख को सहना कुछ मत कहना— बहुत पुरानी बात है। दुःख सहना, पर सब कुछ कहना यही समय की बात है। दुःख को बना के एक कबूतर बिल्ली को अर्पित कर...
Girl, Woman

पीड़ा, नायिका

पीड़ा ढल चुका है दिन ढल गया पुष्पों का यौवन... अछोर आकाश में अब चाँद ढल रहा धीरे-धीरे डूब रहे हैं नक्षत्र देखो! रात ढल गई आधी-आधी... आयु ढल गई ढल गए वे दिन सहर्ष जिए थे जो...
Faiz Ahmad Faiz

दर्द आएगा दबे पाँव

और कुछ देर में जब फिर मेरे तन्हा दिल को फ़िक्र आ लेगी कि तन्हाई का क्या चारा करे दर्द आएगा दबे पाँव लिए सुर्ख़ चराग़ वो जो...
God

वसीयत

सुख एक ख़ूबसूरत परिकल्पना है जीवन, कम और अधिक दुःख के मध्य चयन की जद्दोजहद! मार्ग के द्वंद में फँसे, नियति को देते हैं हम मन्नतों की रिश्वतें देवता मनुष्यों के...
Woman Face Painting

अनूदित पीड़ाएँ

आसमान साफ़ होकर भी धुंधलाया था। पीड़ा के खंडित अवशेष पाषाण नहीं होते हमेशा। अनूदित पीड़ाएँ लहलहाते खेतों में बंजर अवशेष थीं। सम्पन्नता में विपन्न जी रहीं अधमरी फसलें... अपुष्ट कुपोषित! कलकल छलछल बहती नदियों...
Woman Tree

पीड़ा

वृक्ष मूक नहीं होते, उनकी होती है आवाज़, विरली-सी, सांकेतिक भाषा। वो ख़ुद कुछ नहीं बोलते लेकिन घोंसलों में भरते हैं नन्हें पक्षी जब विलय की किलकारियाँ, उनको रिझाने,...
Tribe, Village, Adivasi, Labour, Tribal, Poor

राकेश मिश्र की कविताएँ

सन्नाटा हवावों का सनन् सनन् ऊँग ऊँग शोर दरअसल एक डरावने सन्नाटे का शोर होता है, ढेरों कुसिर्यों के बीच बैठा अकेला आदमी झुण्ड से बिछड़ा अकेला पशु आसानी से महसूस कर सकता...
Rakhi Singh

दूरियों से कोई पीड़ा ख़त्म नहीं होती

'Dooriyon Se Koi Peeda Khatm Nahi Hoti', a poem by Rakhi Singh कई दिनों से कलाई के पास की नस में तीखा-सा दर्द रह रहा है डॉक्टर...
Poonam Sonchhatra

मीठी पीड़ा

'Meethi Peeda', a poem by Poonam Sonchhatra मैं प्रेम में थी या प्रेम मुझमें था... अमावस की काली रात में भी झर-झर झरती रही शरद पूनम की शुभ्र चाँदनी मैंने...

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Ashok Vajpeyi

वही तो नहीं रहने देगा

कविता संग्रह 'कहीं नहीं वहीं' से  प्रेम वही तो नहीं रहने देगा उसके शरीर की लय को, उसके लावण्य की आभा को उसके नेत्रों के क्षितिज ताकते एकान्त...
Devesh Path Sariya

स्त्री से बात

स्त्री से बात करने के लिए निश्चित तौर पर तुम में सलीक़ा होना चाहिए फिर सीखो उसे सुनते जाना उसकी चुप्पी के आयाम तक सीखो ख़ुद भी बातें बनाना कभी चुप हो...
Sahir Ludhianvi

इंसाफ़ का तराज़ू जो हाथ में उठाए

इंसाफ़ का तराज़ू जो हाथ में उठाए जुर्मों को ठीक तोले ऐसा न हो कि कल का इतिहासकार बोले मुजरिम से भी ज़ियादा मुंसिफ़ ने ज़ुल्म ढाया कीं पेश...
Agyeya

क्योंकि मैं

क्योंकि मैं यह नहीं कह सकता कि मुझे उस आदमी से कुछ नहीं है जिसकी आँखों के आगे उसकी लम्बी भूख से बढ़ी हुई तिल्ली एक गहरी मटमैली पीली...
Parveen Shakir

कू-ब-कू फैल गई बात शनासाई की

कू-ब-कू फैल गई बात शनासाई की उसने ख़ुशबू की तरह मेरी पज़ीराई की कैसे कह दूँ कि मुझे छोड़ दिया है उसने बात तो सच है मगर...
Woman Abstract

अपर्याप्त

क्रोध का हलाहल इतना व्याप्त था कि उसका सम्पूर्ण अस्तित्व हो गया था विषमय मेरे पास थी सिर्फ़ एक बूँद मिठास चाहा था उसे सागर में घोलना उसे मीठा करना पर...
Orhan Veli Kanik

ओरहान वेली की दो कविताएँ

कविताएँ: ओरहान वेली अनुवाद: देवेश पथ सारिया मेरी पूर्व पत्नी हर रात तुम मेरे सपनों में आती हो हर रात मैं तुम्हें साटन की सफ़ेद चादर पर देखता...
Manav Kaul - Antima

मानव कौल – ‘अंतिमा’

मानव कौल के उपन्यास 'अंतिमा' से उद्धरण | Quotes from 'Antima' by Manav Kaul चयन व प्रस्तुति: पुनीत कुसुम   "बहुत वक़्त तक मैं मेरे भीतर की...
Alok Kumar Mishra

‘क’ से ‘कमल’, ‘क’ से ‘कश्मीर’

'क' से 'कमल' वाले इस देश में 'क' से 'कश्मीर' भी हो सकता है पर उसके लिए आँखों को थोड़ा सजल करना होगा हृदय में उतरना होगा दिमाग़ की परतों...
Kaun Hain Bharat Mata - Purushottam Agrawal

किताब अंश: ‘कौन हैं भारत माता?’ – पुरुषोत्तम अग्रवाल

राष्ट्र और राष्ट्रवाद को लेकर देश में लगातार चल रही बहसों के बीच राजकमल प्रकाशन ने 'कौन हैं भारत माता' पुस्तक प्रकाशित की है।...
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