Tag: Pain

Harish Bhadani

सभी सुख दूर से गुज़रें

सभी सुख दूर से गुज़रें गुज़रते ही चले जाएँ मगर पीड़ा उमर भर साथ चलने को उतारू है!हमको सुखों की आँख से तो बाँचना आता नहीं हमको...
Man, Sad, Black, Abstract, Grief

दोपहर का भोजन

दुःख दुःख को सहना कुछ मत कहना— बहुत पुरानी बात है।दुःख सहना, पर सब कुछ कहना यही समय की बात है।दुःख को बना के एक कबूतर बिल्ली को अर्पित कर...
Girl, Woman

पीड़ा, नायिका

पीड़ा ढल चुका है दिन ढल गया पुष्पों का यौवन... अछोर आकाश में अब चाँद ढल रहा धीरे-धीरे डूब रहे हैं नक्षत्र देखो! रात ढल गई आधी-आधी...आयु ढल गई ढल गए वे दिन सहर्ष जिए थे जो...
Faiz Ahmad Faiz

दर्द आएगा दबे पाँव

और कुछ देर में जब फिर मेरे तन्हा दिल को फ़िक्र आ लेगी कि तन्हाई का क्या चारा करे दर्द आएगा दबे पाँव लिए सुर्ख़ चराग़ वो जो...
God

वसीयत

सुख एक ख़ूबसूरत परिकल्पना है जीवन, कम और अधिक दुःख के मध्य चयन की जद्दोजहद!मार्ग के द्वंद में फँसे, नियति को देते हैं हम मन्नतों की रिश्वतें देवता मनुष्यों के...
Woman Face Painting

अनूदित पीड़ाएँ

आसमान साफ़ होकर भी धुंधलाया था। पीड़ा के खंडित अवशेष पाषाण नहीं होते हमेशा।अनूदित पीड़ाएँ लहलहाते खेतों में बंजर अवशेष थीं। सम्पन्नता में विपन्न जी रहीं अधमरी फसलें... अपुष्ट कुपोषित!कलकल छलछल बहती नदियों...
Woman Tree

पीड़ा

वृक्ष मूक नहीं होते, उनकी होती है आवाज़, विरली-सी, सांकेतिक भाषा।वो ख़ुद कुछ नहीं बोलते लेकिन घोंसलों में भरते हैं नन्हें पक्षी जब विलय की किलकारियाँ, उनको रिझाने,...
Tribe, Village, Adivasi, Labour, Tribal, Poor

राकेश मिश्र की कविताएँ

सन्नाटा हवावों का सनन् सनन् ऊँग ऊँग शोर दरअसल एक डरावने सन्नाटे का शोर होता है, ढेरों कुसिर्यों के बीच बैठा अकेला आदमी झुण्ड से बिछड़ा अकेला पशु आसानी से महसूस कर सकता...
Rakhi Singh

दूरियों से कोई पीड़ा ख़त्म नहीं होती

'Dooriyon Se Koi Peeda Khatm Nahi Hoti', a poem by Rakhi Singhकई दिनों से कलाई के पास की नस में तीखा-सा दर्द रह रहा है डॉक्टर...
Poonam Sonchhatra

मीठी पीड़ा

'Meethi Peeda', a poem by Poonam Sonchhatraमैं प्रेम में थी या प्रेम मुझमें था...अमावस की काली रात में भी झर-झर झरती रही शरद पूनम की शुभ्र चाँदनीमैंने...

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अनुवाद: पंखुरी सिन्हा औंधा पड़ा सपना प्यार दरअसल फाँसी का पुराना तख़्ता है, जहाँ हम सोते हैं! और जहाँ से हमारी नींद, देखना चाह रही होती है चिड़ियों की ओर!मत...
Daisy Rockwell - Geetanjali Shree

डेज़ी रॉकवेल के इंटरव्यू के अंश

लेखक ने अपनी बात कहने के लिए अपनी भाषा रची है, इसलिए इसका अनुवाद करने के लिए आपको भी अपनी भाषा गढ़नी होगी। —डेज़ी...
Kalam Ka Sipahi - Premchand Jeevani - Amrit Rai

पुस्तक अंश: प्रेमचंद : कलम का सिपाही

भारत के महान साहित्यकार, हिन्दी लेखक और उर्दू उपन्यासकार प्रेमचंद किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं। प्रेमचंद ने अपने जीवन काल में कई रचनाएँ...
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आधे-अधूरे: एक सम्पूर्ण नाटक समीक्षा: अनूप कुमार मोहन राकेश (1925-1972) ने तीन नाटकों की रचना की है— 'आषाढ़ का एक दिन' (1958), 'लहरों के राजहंस' (1963)...
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लम्बी कविता: डरावना स्वप्न (एक)हर रात वही डरावना सपना लगभग तीन से चार बजे के बीच आता है और रोम-रोम कँपा जाता है बहुत घबराहट के साथ पसीने-पसीने हुआ-सा...
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हम पृथ्वी की शुरुआत से स्त्री हैं सरकारें बदलती रहीं तख़्त पलटते रहे हम स्त्री रहे विचारक आए विचारक गए हम स्त्री रहे सैंकड़ों सावन आए अपने साथ हर दूषित चीज़ बहा...
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पाकिस्तानी शायरा सारा शगुफ़्ता की नज़्मों का पहला संग्रह 'आँखें' उनकी मृत्यु के बाद सन् 1985 में प्रकाशित हुआ था। हाल ही में इसी...
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