मीठी पीड़ा

‘Meethi Peeda’, a poem by Poonam Sonchhatra

मैं प्रेम में थी
या प्रेम मुझमें था…

अमावस की काली रात में भी
झर-झर झरती रही शरद पूनम की शुभ्र चाँदनी

मैंने शृंगार लिखा और अपनी पलकें झुका लीं

ऐसा क्या है जो नहीं कहा गया पहले
मुझे नयी परिभाषाएँ गढ़नी हैं
एकांत दुपहरी में बदली गई हर एक करवट
तुम्हारी अनावृत पीठ पर
एक मीठी कविता लिखने के लिए आकुल है
तुम्हारी अंग रेखाओं में
मैं पूरा ब्रह्माण्ड नापना चाहती हूँ

किसी मीठे पानी के झरने-सी
फूट पड़ती है
नैनों से अश्रुधारा

प्रेम संसार की सबसे मीठी पीड़ा है…

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