एक शाम सिर्फ़ अँधेरे से सजाई जाये
हवाएँ दबे पाऊँ आकर
स्लाइडिंग की दराज़ों में
बैठ जाएँ
तुम्हारी पिंडिलयों पर
मेरे पैर का अंगूठा लिख रहा हो
रात का सियाह गुदाज़ लफ़्ज़
तुम्हारी दाईं उँगलियों के नाख़ुन मेरे कंधे पर
गड़ रहे हों एक अन-कहे हर्फ़ की लज़्ज़त
होंठ तुम्हारे
दायरे की शक्ल में ढल कर
बन जाएँ फड़कती हुई आँख
या फिर कपकपाती हुई शम्मा की लौ
और मैं तुम्हारी गर्दन की साँवली
तितलियों का रंग चखूँ
तब तक, जब तक ये रंग मेरे तलवों तक भर कर
छलकने न लगें
और कमरे में अंगड़ाई लेकर जाग उठे
दुनिया की सबसे रंगीन सहर!

यह भी पढ़ें: तसनीफ़ हैदर की नज़्म ‘क़ुदरत की सबसे हसीन तख़लीक़’

तसनीफ़
तसनीफ़ हिन्दी-उर्दू शायर व उपन्यासकार हैं। उन्होंने जामिआ मिल्लिया इस्लामिया से एम. ए. (उर्दू) किया है। साथ ही तसनीफ़ एक ब्लॉगर भी हैं। उनका एक उर्दू ब्लॉग 'अदबी दुनिया' है, जिसमें पिछले कई वर्षों से उर्दू-हिन्दी ऑडियो बुक्स पर उनके यूट्यूब चैनल 'अदबी दुनिया' के ज़रिये काम किया जा रहा है। हाल ही में उनका उपन्यास 'नया नगर' उर्दू में प्रकाशित हुआ है। तसनीफ़ से [email protected] पर सम्पर्क किया जा सकता है।