‘Abhisaar’, a poem by Akhileshwar Pandey

काजल की पतली रेखा घटाटोप बारिश चाहती है
उसकी पनीली आँखों में तैर रहे सुनहरे सपने
मैं बूँद-बूँद पी रहा हूँ
उसके होंठों की प्यास
सुराहीदार गरदन को चूमते ही
बन्द हो गयी आँखें

प्यार कहने में नहीं
देखने में है
आँखों की बयानी
होठों की ज़ुबानी से ज़्यादा असरदार है

उसकी पीठ पर बनी गहरी नदी में तैर रही हैं मेरी उँगलियाँ
यह शरारत नहीं
चाहत का आमन्त्रण है
सिसकियों से सिहरकर
बरस रहे हैं बादल
उर्वर वन में…

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अखिलेश्वर पांडेय
पत्रकारिता | जमशेदपुर (झारखंड) में निवास | पुस्तक : पानी उदास है (कविता संग्रह) - 2017 प्रकाशन: हंस, नया ज्ञानोदय, वागर्थ, पाखी, कथादेश, परिकथा, कादंबिनी, साक्षात्कार, इंद्रप्रस्थ भारती, हरिगंधा, गांव के लोग, दैनिक जागरण, दैनिक भास्कर, प्रभात खबर आदि अनेक पत्र-पत्रिकाओं में कविताएं, पुस्तक समीक्षा, साक्षात्कार व आलेख प्रकाशित. कविता कोश, हिन्दी समय, शब्दांकन, स्त्रीकाल, हमरंग, बिजूका, लल्लनटॉप, बदलाव आदि वेबसाइट व ब्लॉग पर भी कविताएं व आलेख मौजूद. प्रसारण: आकाशवाणी जमशेदपुर, पटना और भोपाल से कविताएं व रेडियो वार्ता प्रसारित. फेलोशिप/पुरस्कार: कोल्हान (झारखंड) में तेजी से विलुप्त होती आदिम जनजाति सबर पर शोधपूर्ण लेखन के लिए एनएफआई का फेलोशिप और नेशनल मीडिया अवार्ड. ई-मेल : [email protected]