जब जन्म देती है एक माँ
कोई-कोई ही पूछता है-
“जच्चा-बच्चा ठीक हैं,
माँ का कितना ख़ून बहा,
क्या सर्जरी करनी पड़ी?”

वरना, कुशल-क्षेम
सिर्फ़ बच्चे की होती है,
जन्मदात्री की फ़िक्र
क्यूँ नहीं करते लोग
अन्यथा शल्य-चिकित्सा
झेले मरीज-सी?

लाज़मी है
नवजीवन का स्वागत,
होती ही ऐसी है कुछ
शिशु की मुस्कुराहट

अचरज यह
कि माँ की अनदेखी
और शिशु की मुस्कान के भक्तों में
सबसे चरम पर उन्मत्त, बावरी
स्वयं, माँ होती है!

देवेश पथ सारिया
देवेश पथ सारिया एक हिन्दी कवि-गद्यकार एवं अनुवादक हैं। कविता संकलन : अदृश्य आत्मीय की टोह में (2025), नूह की नाव (2022)।‌ कथेतर गद्य : छोटी आँखों की पुतलियों में (ताइवान डायरी, 2022)। कहानी संग्रह : स्टिंकी टोफू (2025)। अनुवाद : सपने बुनता फाॅरमोसा : ताइवानी कविताएँ (2026), यातना शिविर में साथिनें (2023)। अन्य भाषाओं में पुस्तकें : A Toast to Winter Solstice (अंग्रेज़ी अनुवाद : शिवम तोमर)। पुरस्कार : भारतभूषण अग्रवाल पुरस्कार (2023), स्नेहमयी चौधरी सम्मान (2025)। अन्य भाषाओं मे अनुवाद : देवेश की रचनाओं का अनुवाद अंग्रेज़ी, मंदारिन‌ (चीनी), स्पेनिश, रूसी, ताइवानी, नेपाली, उर्दू, बांग्ला, मराठी, पंजाबी, असमिया, भोजपुरी, राजस्थानी, हरियाणवी, गढ़वाली और कुमाऊँनी में हुआ है। संपादन : गोल चक्कर वेब पत्रिका (golchakkar.org) ईमेल : [email protected]