इतिहास के मुँह पर
कालिख मली गयी
मिटा दिए गए
सभ्यताओं के वो हर निशान
जो तुम्हें
सर्वश्रेष्ठ कहलाने का
अधिकार देते थे
विधाता की अनुपम
रचना को भी
झुठलाया गया
महत्वाकांक्षाओं की आड़ में
तुमने स्वयं को भी
मिटा डाला
अगर बचा पाना तो
नन्हीं आँखों के
अदेखे ख़्वाब बचा लेना…

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