Excerpt from a poem ‘To Duration’ by Peter Handke
अनुवाद: उपमा ‘ऋचा’

न जाने कब से
मैं दूरियों के बारे में लिखना चाहता था।
कोई निबन्ध नहीं
कोई नाटक नहीं
कोई कहानी भी नहीं
मेरी दूरियाँ हमेशा
कविता को पुकारती थीं।
मैं कविता के साथ ख़ुद से सवाल करना चाहता था
याद रखना चाहता था ख़ुद को कविता के साथ
यह दावा और वसूली भी कविता के साथ कविता की शक्ल में
कि दूरियाँ क्या होती हैं…
शायद इसीलिए मैं
बार-बार, बार-बार
अनुभव करता हूँ
दूरियों का…
दूरियाँ, सेंट मैरी फ़ाउन्टेन पर शुरुआती वसंत में
दूरियाँ, पोर्टे ड्यूटिल पर सर्द रातों में
दूरियाँ, कार्स्ट के सूरज की धूप में
और दूरियाँ,
प्यार के बाद सुबह होने से पहले घर के रास्ते में…

यह भी पढ़ें: ज़ेनेप हातून की कविता ‘मैं’

Previous articleसुन्दर और अच्छी
Next articleभाव
उपमा 'ऋचा'
पिछले एक दशक से लेखन क्षेत्र में सक्रिय। वागर्थ, द वायर, फेमिना, कादंबिनी, अहा ज़िंदगी, सखी, इंडिया वाटर पोर्टल, साहित्यिकी आदि विभिन्न पत्र पत्रिकाओं में कविता, कहानी और आलेखों का प्रकाशन। पुस्तकें- इन्दिरा गांधी की जीवनी, ‘एक थी इंदिरा’ का लेखन. ‘भारत का इतिहास ‘ (मूल माइकल एडवर्ड/ हिस्ट्री ऑफ़ इण्डिया), ‘मत्वेया कोझेम्याकिन की ज़िंदगी’ (मूल मैक्सिम गोर्की/ द लाइफ़ ऑफ़ मत्वेया कोझेम्याकिन) ‘स्वीकार’ (मूल मैक्सिम गोर्की/ 'कन्फेशन') का अनुवाद. अन्ना बर्न्स की मैन बुकर प्राइज़ से सम्मानित कृति ‘मिल्कमैन’ के हिन्दी अनुवाद ‘ग्वाला’ में सह-अनुवादक. मैक्सिम गोर्की की संस्मरणात्मक रचना 'लिट्रेरी पोर्ट्रेट', जॉन विल्सन की कृति ‘इंडिया कॉकर्ड’, राबर्ट सर्विस की जीवनी ‘लेनिन’ और एफ़. एस. ग्राउज़ की एतिहासिक महत्व की किताब ‘मथुरा : ए डिस्ट्रिक्ट मेमायर’ का अनुवाद प्रकाशनाधीन. ‘अतएव’ नामक ब्लॉग एवं ‘अथ’ नामक यूट्यूब चैनल का संचालन...सम्प्रति- स्वतंत्र पत्रकार एवम् अनुवादक

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here