हरिशंकर परसाई के उद्धरण | Harishankar Parsai Quotes

 

‘पवित्रता का दौरा’ से

“पवित्रता की भावना से भरा लेखक उस मोर जैसा होता है जिसके पाँव में घुँघरू बाँध दिए गए हों!”

 

“हम मानसिक रूप से ‘दोगले’ नहीं, ‘तिगले’ हैं। संस्कारों से सामन्तवादी हैं, जीवन मूल्य अर्द्ध-पूँजीवादी हैं और बातें समाजवाद की करते हैं।”

 

“जिस समाज के लोग शर्म की बात पर हँसें और ताली पीटें, उसमें क्या कभी कोई क्रांतिकारी हो सकता है?”

 

यह भी पढ़ें: हरिशंकर परसाई की किताब ‘अपनी अपनी बीमारी’ से उद्धरण

Book by Harishankar Parsai: