वृंदावन के बागों से प्रेम की खुशबू
बनारस के इश्क़ में डूबी घाटों की शामें
प्रयाग के मेलों के कुछ चटक रंग
अपनी ग़ज़लों में लिखूँगा
मैं तुम्हारा हुस्न नहीं
अपना इश्क़ लिखूँगा
तुम पूछती हो अल्फ़ाज़ लाओगे कहाँ से मेरे हुस्न के लिए
मैं पूछता हूँ
तुम इतना इश्क़ समेटोगी कहाँ से?

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