‘Mere Ghar Ke Pashchim Or Rehti Hai’, Hindi Kavita by Suryakant Tripathi Nirala

मेरे घर के पश्चिम ओर रहती है
बड़ी-बड़ी आँखों वाली वह युवती,
सारी कथा खुल-खुल कर कहती है
चितवन उसकी और चाल-ढाल उसकी।
पैदा हुई है ग़रीब के घर, पर
कोई जैसे जेवरों से सजता हो,
उभरते जीवन की मीड़ खाता हुआ
राग साज पर जैसे बजता हो।
आसमाँ को छूती हुई वह आवाज़
दिल के तार-तार से मिलाई हुई,
चढ़ाती है गिरने का जहाँ नहीं डर
कली की सुगन्ध जैसे छाई हुई।
चढ़ी हुई है वह किसी देवता पर
जहाँ से लगता है सारा जग सुन्दर।

यह भी पढ़ें: निराला की कविता ‘वह तोड़ती पत्थर’

Book By Suryakant Tripathi Nirala:

Previous articleबुख़ारी साहब
Next articleसरहदें
सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला'
सूर्यकान्त त्रिपाठी 'निराला' (21 फरवरी, 1899 - 15 अक्टूबर, 1961) हिन्दी कविता के छायावादी युग के चार प्रमुख स्तंभों में से एक माने जाते हैं। वे जयशंकर प्रसाद, सुमित्रानंदन पंत और महादेवी वर्मा के साथ हिन्दी साहित्य में छायावाद के प्रमुख स्तंभ माने जाते हैं। उन्होंने कहानियाँ, उपन्यास और निबंध भी लिखे हैं किन्तु उनकी ख्याति विशेषरुप से कविता के कारण ही है।