दुनिया की सारी पाक किताबें
कहती हैं
कोई वस्तु बेकार नहीं
कोई हलचल, कोई बात
कोई दिन, कोई रात
कोई कण, कोई क्षण
बेमतलब नहीं

दुनिया की सारी पाक किताबें
कहती हैं
खून औरआँसू
हैं सबसे पाक
इनके निशां नहीं मिटते..

दुनिया की सारी पाक किताबें
कह रही हैं
धब्बे साफ़ नहीं होंगे,
गुनाह माफ़ नहीं होंगे,
एक न एक दिन
खून और आँसू
बोल पड़ेंगे,
इंसाफ होगा!

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उसामा हमीद
अपने बारे में कुछ बता पाना उतना ही मुश्किल है जितना खुद को खोज पाना.

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