उबेरतो स्तबिल, स्पेनिश कवि और चर्चित अंतर्राष्ट्रीय स्पेनिश पत्रिका के सम्पादक हैं, उनकी कई किताबें प्रकाशित और अनूदित हो चुकी हैं।

अनुवाद: पंखुरी सिन्हा

एक पाठक का अकेलापन

मुझमें वह तत्व
अथवा आयाम ही नहीं
जो मारा-मारा घूमता फिरता है
जानें लेता लोगों की
एक टेढ़ी, भरी हुई बन्दूक़ से
न ही मुझमें वह तत्व है
जो मुझसे काम करवा ले
बाईस घण्टों तक
किसी मिस्टर क्योटो या
मिस्टर शपिरो के लिए!
तुम्हारे तथाकथित ख़राब बाल वाले दिन
मेरी ग़लती नहीं हैं
और मेरा कोई लेना-देना नहीं
उन दो सौ संरक्षित नीले बंदरों के
दम्पतियों से
जो अपना मुँह छिपाते रहते हैं
कीचड़ में
ख़ासकर, देखते ही पूरे चाँद का उदय!
यों भी, मैंने बारम्बार
ख़ुद को समझाने की
कोशिश की है
अपनी हर दिन की उपयोगिता को लेकर
जैसे कि कोई जादूगर होऊँ मैं
किसी काली शक्ति के आगे
बारिश के आगमन के लिए
मनुहार करता हुआ!
हर सुबह, हर मनहूस
रूटीनी सुबह
दुरेरो के सामने किसी ओरांगुटान की तरह
मैं बैठता रहा
टाइप राइटर के सामने
उसे देखता हुआ
सोचता हुआ अपने अकेलेपन के
दर्द के बारे में
काग़ज़ की उदासी पर!
मैंने पूछा है अपने से बार-बार
कि क्या मैं किसी भी तरह था
ज़िम्मेदार, मध्य काल में जेस्टेर की मृत्यु का
या कि संयोगवश या दुर्योगवश
मैं उत्तरदायी था
मेन के डूब जाने का
या कि मैंने साज़िश रची थी
रासपुतिन के साथ
लेकिन, बहुत गहरे भीतर
मैं जानता हूँ
कि ये सवाल केवल भटकाव हैं
या मन बहलाव
मेरी असल समस्या
ख़यालों के साथ
मेरी पुरानी और अशेष ट्रैजेडी
मेरे अड़ियल दिल की ज़िद
जो कि एक ख़ास क़िस्म की
सजावटी, नपी-तुली अभिव्यक्ति
के लिए नहीं बना था!
नहीं मिली थी
बिआऊ आर्ट्स की जन्मजात प्रतिभा उसे!
मैं लिख सकता था
युद्ध के बारे में
आतंक और अत्याचार के बारे में
उनके अकेलेपन के बारे में भी
जो अलग हैं
लेकिन आत्मा के लिए
इससे ज़्यादा भयावह
और त्रासद कुछ नहीं होता
कि उसे एहसास नहीं
पूरा पता हो
उस हिक़ारत के बारे में
जो उपजी और उकेरी गई हो
ठीक उस क्षण और स्थान के बारे में!

बहुत सुबह, बहुत जल्दी, बहुत पहले

मैं एक साथ कई घण्टों तक
सो नहीं पाता
कोशिश करता हूँ उठने की
बिना किये बहुत ज़्यादा शोर
बच्चे अब भी सो रहे हैं
मैं कॉफ़ी बनाता हूँ
एक सिगरेट जलाता हूँ
सर्दी के मौसम की तरह
ठण्डा है रसोईघर
और बाहर हो रही है
बारिश
और उसने भिगो दिये हैं
हमारे कल धोकर
फैलाए हुए कपड़े
और अब बेकार है
उन्हें बीच बारिश में उठाना
वैसे ही जैसे बेकार है
एक बार फिर
काम करने की कोशिश
एक गुमशुदा मौक़े को
पकड़ने की दुबारा
या फिर बेकार है
ब्रेड ख़रीदने के लिए
बाहर जाना बिना पैसों के!
दुकानों के अपने दरवाज़े
खोलने का समय नहीं हुआ अभी
अभी बहुत सुबह है
अखब़ार पढ़ने का भी
समय नहीं हुआ अभी
संगीत अथवा कुछ भी सुनने के लिए
बहुत सुबह है अभी
इतने सवेरे फ़ोन भी नहीं
किया जा सकता है
डिलिवरी बॉय को
उससे कुछ सोडा, पॉप अथवा
अन्य कैन्स मँगवाने के लिए!
लेकिन, मेरे पास कॉफ़ी है
तम्बाकू और एक घर
एक बेवक़ूफ़ी, नादानी
कइयों की तरह की
मेरे जैसे अभ्यस्त कविता के
आलोचक के लिए
एक विलास
जो अब एक अरबलोगों के लिए है
एक ऐसे देश में
जहाँ वे कहते हैं
सब बढ़िया चल रहा है…!

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