कविताएँ: ओरहान वेली
अनुवाद: देवेश पथ सारिया

मेरी पूर्व पत्नी

हर रात तुम मेरे सपनों में आती हो
हर रात मैं तुम्हें साटन की सफ़ेद चादर पर देखता हूँ
हर रात शैतान मुझे तुम्हारे पास सुला देता है

तुम्हें मालूम है क्यों

क्योंकि हे मेरी स्त्री, मैं अब भी तुमसे प्यार करता हूँ
हालाँकि तुम छोड़ चुकी हो मुझे
तुम एक बेहद विशेष औरत हो
तुम जैसी ढूँढ पाना बहुत मुश्किल है।

ख़ुशनुमा मौसम

वसंत के सुंदर दिनों ने तबाह कर दी मेरी ज़िन्दगी
क्षीण हो गए मेरे सारे गुण
अपनी पहली सिगरेट मैंने वसंत में सुलगायी
मुझे प्रेम हुआ वसंत में
वसंत के एक दिन मैं रोटी और मक्खन घर लाना भूल गया
और यह वसंत का ही एक दिन था जब मैंंने कविताएँ लिखने की शुरुआत की
वसंत के इस ख़ुशनुमा मौसम ने मेरी पूरी ज़िन्दगी तबाह कर दी…

तुर्किश कवि ओरहान वेली की ये कविताएँ poemhunter.com वेबसाइट से ली गई हैं। इनका हिन्दी अनुवाद देवेश पथ सारिया ने किया है जो कि रवि कोपरा के अंग्रेज़ी अनुवाद पर आधारित है।
ओरहान वेली की कविता 'मैं समझा नहीं सकता'

Book by Orhan Veli:

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देवेश पथ सारिया
हिंदी कवि। कथेतर गद्य लेखन एवं कविताओं के अनुवाद में भी सक्रिय। सम्प्रति: ताइवान में खगोल शास्त्र में पोस्ट डाक्टरल शोधार्थी। मूल रूप से राजस्थान के राजगढ़ (अलवर) से सम्बन्ध। साहित्यिक पत्रिकाओं में प्रकाशन: हंस, नया ज्ञानोदय, वागर्थ, कथादेश, कथाक्रम, परिकथा, पाखी, आजकल, बनास जन, बया, मधुमती, कादंबिनी, समयांतर, समावर्तन, जनपथ, नया पथ, कथा, आधारशिला, उद्भावना, दोआबा, बहुमत, परिंदे, कविता बिहान, प्रगतिशील वसुधा, साखी, अकार, गाँव के लोग, विश्वगाथा, ककसाड़, गगनांचल, निकट, अक्षर पर्व, मंतव्य, मुक्तांचल, रेतपथ, कृति ओर, शुक्रवार साहित्यिक वार्षिकी, उम्मीद, अनुगूँज, कला समय, पुष्पगंधा आदि । समाचार पत्रों में प्रकाशन: राजस्थान पत्रिका, दैनिक भास्कर, प्रभात ख़बर, दि सन्डे पोस्ट। वेब प्रकाशन: सदानीरा, जानकीपुल, हिंदवी, पोषम पा, कविता कोश, हिन्दीनेस्ट, इंद्रधनुष, अनुनाद, बिजूका, पहली बार, समकालीन जनमत, मीमांसा, शब्दांकन, कारवां, साहित्यिकी, अथाई, हिन्दीनामा, द साहित्यग्राम, लिटरेचर पॉइंट।