सुबह घर से चले,
सोचा था दिन बहुत अच्छा जायेगा,
पर जब देखना चाहा अपना चेहरा उनकी आँखों में,
हमे क्या पता था कि वहां किसी और का चेहरा नजर आएगा,
वो दूजा भी कोई गैर ना था,
मेरा उससे कोई बैर भी ना था,
मैं चाह कर भी कुछ कर न पाया,
शायद किस्मत को यही मंजूर था,
एक पल में उनके थे हम,
दूजे ही पल जुदा हो गए,
दिल में जितने भी अरमान थे,
वो पल भर में चकना चूर हो गए,
रह गए हैं जिंदगी की राह में तन्हा हम,
चारों तरफ बाकी है बस गम ही गम,
क्या इस गम में कोई आएगा हमारा साथ निभाने,
उम्र भर न सही पल भर मिलने के बहाने,
हम तो अपने दिल को समझा लेंगे,
उन्हें एक हसीं सपना समझ के भुला देंगे,
उन्हें भुलाना इतना आसान तो न होगा,
पर अब उन्हें याद करना ही सबसे बड़ा गुनाह होगा,
क्यूंकि प्यार जानता नहीं है लेना,
प्यार तो जानता है देना, देना और सिर्फ देना..

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