लड़का और लड़की की
अपने-अपने घरों में
इतनी भी नहीं चलती थी
कि पर्दों का रंग चुनने तक में
उनकी राय ली जाती

उनकी जेबों की हालत ऐसी थी
कि आधी-आधी बाँटते थे पाव-भाजी
एक्स्ट्रा पाव के बारे में सोच भी नहीं सकते थे

अभिजात्य सपने देखने के मामले में
बहुत संकरी थी
उनकी पुतलियाँ

फिर भी वे शहर के
सबसे ख़ुश दो लोग थे

क्योंकि वे
घास के एक विस्तृत मैदान में
धूप सेंकते हुए
आँखों पर किताब की ओट कर
कह सकते थे
कि उन्हें प्रेम है एक-दूसरे से!

देवेश पथ सारिया
देवेश पथ सारिया एक हिन्दी कवि-गद्यकार एवं अनुवादक हैं। कविता संकलन : अदृश्य आत्मीय की टोह में (2025), नूह की नाव (2022)।‌ कथेतर गद्य : छोटी आँखों की पुतलियों में (ताइवान डायरी, 2022)। कहानी संग्रह : स्टिंकी टोफू (2025)। अनुवाद : सपने बुनता फाॅरमोसा : ताइवानी कविताएँ (2026), यातना शिविर में साथिनें (2023)। अन्य भाषाओं में पुस्तकें : A Toast to Winter Solstice (अंग्रेज़ी अनुवाद : शिवम तोमर)। पुरस्कार : भारतभूषण अग्रवाल पुरस्कार (2023), स्नेहमयी चौधरी सम्मान (2025)। अन्य भाषाओं मे अनुवाद : देवेश की रचनाओं का अनुवाद अंग्रेज़ी, मंदारिन‌ (चीनी), स्पेनिश, रूसी, ताइवानी, नेपाली, उर्दू, बांग्ला, मराठी, पंजाबी, असमिया, भोजपुरी, राजस्थानी, हरियाणवी, गढ़वाली और कुमाऊँनी में हुआ है। संपादन : गोल चक्कर वेब पत्रिका (golchakkar.org) ईमेल : [email protected]