लड़का और लड़की की
अपने-अपने घरों में
इतनी भी नहीं चलती थी
कि पर्दों का रंग चुनने तक में
उनकी राय ली जाती

उनकी जेबों की हालत ऐसी थी
कि आधी-आधी बाँटते थे पाव-भाजी
एक्स्ट्रा पाव के बारे में सोच भी नहीं सकते थे

अभिजात्य सपने देखने के मामले में
बहुत संकरी थी
उनकी पुतलियाँ

फिर भी वे शहर के
सबसे ख़ुश दो लोग थे

क्योंकि वे
घास के एक विस्तृत मैदान में
धूप सेंकते हुए
आँखों पर किताब की ओट कर
कह सकते थे
कि उन्हें प्रेम है एक-दूसरे से!