‘Satta Parivartan’, a poem by Prita Arvind

एक और चुनाव के बाद
जनता ने पुराने नेताओं को
बाहर का रास्ता दिखा दिया
और एक नयी सरकार को
अपने सर माथे पर बिठा लिया
राजधानी के
ऐतिहासिक मैदान में
ढोल माँदर और
गाजे-बाजे के साथ
नये हुक्मरानों ने
लाइन में खड़े अंतिम आदमी की
दरिद्रनारायण की सेवा की
शपथ ली
उनके जल जंगल ज़मीन की
सुरक्षा की सौगंध खायी
शपथ ग्रहण समारोह में
सूबे की सभी नामी गिरामी
हस्ती विराजमान थीं
अगली पंक्ति में
उन में कुछ वे थे
जिनका प्रोजेक्ट
भूमि विवाद के कारण
बंद पड़ा था
आदिवासियों ने
अपने पुरखों की ज़मीन
उन्हें देने से मना कर दिया था
कुछ की परियोजनाओं
का निर्माण कार्य
वन विभाग से अनापत्ति
नहीं मिलने के कारण
वर्षों से लटका पड़ा था
कुछ की मिलें बंद
हो गयी थीं
हज़ारों ग़रीबों की
रोज़ी रोटी चली गई थी
इन मिलों को
बग़ल वाली नदी में
बहाए जाने वाले कचड़े में
निर्धारित सीमा से हज़ार गुना
अधिक ख़तरनाक केमिकल
होने के कारण
बंद करा दिया गया था
इन सभी को
नयी सरकार से
बहुत उम्मीदें थी
इनके चेहरों की
चमक से यह
बिलकुल साफ़ था
नये मुख्यमंत्री ने
शपथ ग्रहण के बाद
एक-एक कर इन सभी से
हाथ मिलाकर
अभिवादन स्वीकार किया
और राज्य के विकास में
हाथ बँटाने का आग्रह किया
इस सबसे दूर
पारम्परिक वेश भूषा में
स्वागत समारोह के लिए
लाए गए आदिवासी
नर्तक नर्तकियाँ
अपना पारिश्रमिक ले
मैदान से जा चुके थे
सत्ता परिवर्तन
पूर्ण हो चुका था
एक और चुनाव के बाद…

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