Tag: Children

Kids

बड़े और बच्चे

1 बच्चे खेलते हैं खेल-खेल में लड़ते हैं मारते भी हैं एक-दूसरे को लेकिन मार नहीं डालते बड़ों की तरह। 2 छोटे बच्चे एक साथ खेलते हैं क्योंकि उन्हें पता नहीं होते लिंग के भेद बड़ों...
Anurag Anant

बच्चों की हँसी, प्रेमियों का चुम्बन और कवि का विद्रोह

'Bachchon Ki Hansi, Premiyon Ka Chumban Aur Kavi Ka Vidroh', a poem by Anurag Anantबच्चों की हँसी से सबसे ज़्यादा डरते हैं तानाशाह प्रेमियों के...
Kid holding a gun

बच्चे का खेल

'Bachche Ka Khel', a poem by Nirmal Guptबच्चे क्लाशिनोकोव से खेलते हैं निकालते हैं मुँह से गड़-गड़, तड़-तड़ की आवाज़ खेल ही खेल में वे धरती पर लोटपोट हुए...

कश्मीर के बच्चे के नाम

वो खेलता गर्मियों में यहाँ घास के दूर तक फ़ैले मैदान में सर्दियों में वो बनाता बर्फ़ के गोले और उछाल देता सूरज की ओरमाँ की काँगड़ी...
Shridhar Pathak

बिल्ली के बच्चे

बिल्ली के ये दोनों बच्चे, कैसे प्यारे हैं, गोदी में गुदगुदे मुलमुले लगें हमारे हैं। भूरे-भूरे बाल मुलायम, पंजे हैं पैने, मगर किसी को नहीं खौसते, दो...
Yellow Leaf

एक पीला पत्ता गिरता है

एक पीला पत्ता गिरता है एक मज़दूर थककर गिरता है एक आदमी भूख से गिरता है एक राजा सत्ता के नशे में गिरता है एक बच्चा चलना सीख...
Patras Bokhari

बच्चे

"ख़ुदा जाने आजकल के बच्चे किस क़िस्म के बच्चे हैं। हमें अच्छी तरह याद है कि हम बक़रईद को थोड़ा सा रो लिया करते थे और कभी-कभार कोई मेहमान आ निकला तो नमूने के तौर पर थोड़ी सी ज़िद कर ली, क्योंकि ऐसे मौक़े पर ज़िद कारआमद हुआ करती थी। लेकिन ये कि चौबीस घंटे मुतवातिर रोते रहें।"
Cycle - Ektara

‘साइकिल’ – बच्चों का दुमहिया

पिछले दिनों सोशल मीडिया पर एक पोस्ट देखी थी जिसका इशारा इस तरफ था कि जिन विद्यार्थियों ने अपने सम्पूर्ण शैक्षिक जीवन में कभी...

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Naomi Shihab Nye

नेओमी शिहैब नाय की कविता ‘प्रसिद्ध’

नेओमी शिहैब नाय (Naomi Shihab Nye) का जन्म सेंट लुइस, मिसौरी में हुआ था। उनके पिता एक फ़िलिस्तीनी शरणार्थी थे और उनकी माँ जर्मन...
Shehar Se Dus Kilometer - Nilesh Raghuwanshi

किताब अंश: ‘शहर से दस किलोमीटर’ – नीलेश रघुवंशी

'शहर से दस किलोमीटर' ही वह दुनिया बसती है जो शहरों की न कल्पना का हिस्सा है, न सपनों का। वह अपने दुखों, अपने...
Shri Vilas Singh

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सड़कें कहीं नहीं जातीं सड़कें कहीं नहीं जातीं वे बस करती हैं दूरियों के बीच सेतु का काम, दो बिंदुओं को जोड़तीं रेखाओं की तरह, फिर भी वे पहुँचा देती...
Ret Samadhi - Geetanjali Shree

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किताब अंश: शाहीन बाग़ – लोकतंत्र की नई करवट

भाषा सिंह की किताब 'शाहीन बाग़ : लोकतंत्र की नई करवट' उस अनूठे आन्दोलन का दस्तावेज़ है जो राजधानी दिल्ली के गुमनाम-से इलाक़े से...
Woman with dupatta

सहेजने की आनुवांशिकता में

कहीं न पहुँचने की निरर्थकता में हम हमेशा स्वयं को चलते हुए पाते हैं जानते हुए कि चलना एक भ्रम है और कहीं न पहुँचना यथार्थदिशाओं के...
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