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ख़ुद दिल में रह के आँख से पर्दा करे कोई
ख़ुद दिल में रह के आँख से पर्दा करे कोई
हाँ लुत्फ़ जब है पा के भी ढूँढा करे कोई
तुम ने तो हुक्म-ए-तर्क-ए-तमन्ना सुना दिया
किस दिल...
चाहे तन मन सब जल जाए
चाहे तन मन सब जल जाए
सोज़-ए-दरूँ पर आँच न आए
शीशा टूटे ग़ुल मच जाए
दिल टूटे आवाज़ न आए
बहर-ए-मोहब्बत तौबा! तौबा!
तैरा जाए न डूबा जाए
ऐ...
दिल को लेकर हमसे अब जाँ भी तलब करते हैं आप
'Dil Ko Lekar Humse', by Nazeer Akbarabadi
दिल को लेकर हमसे अब जाँ भी तलब करते हैं आप
लीजिए हाज़िर है पर ये तो ग़ज़ब करते...
फिर आई फ़स्ल-ए-गुल फिर ज़ख़्म-ए-दिल रह रह के पकते हैं
फिर आई फ़स्ल-ए-गुल फिर ज़ख़्म-ए-दिल रह रह के पकते हैं
मगर दाग़-ए-जिगर पर सूरत-ए-लाला लहकते हैं
नसीहत है अबस नासेह बयाँ नाहक़ ही बकते हैं
जो बहके...
हाय रे, मानव हृदय!
"समाज मेरा आदर करता है कि मैंने नि:संकोच उसके बन्धनों और तुच्छताओं के सम्मुख सिर झुकाया है।"
मन का पुरुष
"मेरे पति सब कुछ थे... पर वे मेरे कल्पना के आदमी, मेरे मन के पुरुष नहीं थे...।"
यह दिल खोल तुम्हारा हँसना
'Yah Dil Khol Tumhara Hansna', a poem by Gopal Singh Nepali
प्रिये तुम्हारी इन आँखों में मेरा जीवन बोल रहा है
बोले मधुप फूल की बोली,...
दिल बहलाव – ii
एक शख्स ने एक बड़े आदमी को उर्दू में दरखास्त लिखी- "खुदा हुजूर की उम्र दराज करे, हुजूर की नजर गुरबा परवरी पर ज्यादा...
दिल की मेरी बेक़रारी
दिल की मेरी बेक़रारी मुझ से कुछ पूछो नहीं
शब की मेरी आह-ओ-ज़ारी मुझ से कुछ पूछो नहीं
बार-ए-ग़म से मुझ पे रोज़-ए-हिज्र में इक-इक घड़ी
क्या...
लेकिन मेरा लावारिस दिल
'Lekin Mera Lawaris Dil', a nazm by Rahi Masoom Raza
मस्जिद तो अल्लाह की ठहरी
मंदिर राम का निकला
लेकिन मेरा लावारिस दिल
अब जिसकी जंबील में कोई...
दिल बहलाव
एक स्कूल मास्टर हाथ में बेंत लिए हुए लड़कों को पढ़ा रहे थे.. बेंत सीधा कर बोले- "हमारे बेंत के कोने के रूबरू एक गधा बैठा है।"
सोचिए उस बेंत के कोने के रूबरू बैठे लड़के का क्या जवाब रहा होगा? ;)
दर्द-ए-दिल में कमी न हो जाए
दर्द-ए-दिल में कमी न हो जाए
दोस्ती दुश्मनी न हो जाए
तुम मिरी दोस्ती का दम न भरो
आसमाँ मुद्दई न हो जाए
बैठता है हमेशा रिंदों में
कहीं...










