Tag: heart

Majaz Lakhnavi

ख़ुद दिल में रह के आँख से पर्दा करे कोई

ख़ुद दिल में रह के आँख से पर्दा करे कोई हाँ लुत्फ़ जब है पा के भी ढूँढा करे कोई तुम ने तो हुक्म-ए-तर्क-ए-तमन्ना सुना दिया किस दिल...
Hafeez Merathi

चाहे तन मन सब जल जाए

चाहे तन मन सब जल जाए सोज़-ए-दरूँ पर आँच न आए शीशा टूटे ग़ुल मच जाए दिल टूटे आवाज़ न आए बहर-ए-मोहब्बत तौबा! तौबा! तैरा जाए न डूबा जाए ऐ...
Nazeer Akbarabadi

दिल को लेकर हमसे अब जाँ भी तलब करते हैं आप

'Dil Ko Lekar Humse', by Nazeer Akbarabadi दिल को लेकर हमसे अब जाँ भी तलब करते हैं आप लीजिए हाज़िर है पर ये तो ग़ज़ब करते...
bhartendu harishchandra

फिर आई फ़स्ल-ए-गुल फिर ज़ख़्म-ए-दिल रह रह के पकते हैं

फिर आई फ़स्ल-ए-गुल फिर ज़ख़्म-ए-दिल रह रह के पकते हैं मगर दाग़-ए-जिगर पर सूरत-ए-लाला लहकते हैं नसीहत है अबस नासेह बयाँ नाहक़ ही बकते हैं जो बहके...
Bhuvaneshwar

हाय रे, मानव हृदय!

"समाज मेरा आदर करता है कि मैंने नि:संकोच उसके बन्धनों और तुच्छताओं के सम्मुख सिर झुकाया है।"
Pratibha Ray

मन का पुरुष

"मेरे पति सब कुछ थे... पर वे मेरे कल्पना के आदमी, मेरे मन के पुरुष नहीं थे...।"
Gopal Singh Nepali

यह दिल खोल तुम्हारा हँसना

'Yah Dil Khol Tumhara Hansna', a poem by Gopal Singh Nepali प्रिये तुम्हारी इन आँखों में मेरा जीवन बोल रहा है बोले मधुप फूल की बोली,...
Balkrishna Bhatt

दिल बहलाव – ii

एक शख्‍स ने एक बड़े आदमी को उर्दू में दरखास्‍त लिखी- "खुदा हुजूर की उम्र दराज करे, हुजूर की नजर गुरबा परवरी पर ज्‍यादा...
Bahadur Shah Zafar

दिल की मेरी बेक़रारी

दिल की मेरी बेक़रारी मुझ से कुछ पूछो नहीं शब की मेरी आह-ओ-ज़ारी मुझ से कुछ पूछो नहीं बार-ए-ग़म से मुझ पे रोज़-ए-हिज्र में इक-इक घड़ी क्या...
Rahi Masoom Raza

लेकिन मेरा लावारिस दिल

'Lekin Mera Lawaris Dil', a nazm by Rahi Masoom Raza मस्जिद तो अल्लाह की ठहरी मंदिर राम का निकला लेकिन मेरा लावारिस दिल अब जिसकी जंबील में कोई...
Balkrishna Bhatt

दिल बहलाव

एक स्कूल मास्टर हाथ में बेंत लिए हुए लड़कों को पढ़ा रहे थे.. बेंत सीधा कर बोले- "हमारे बेंत के कोने के रूबरू एक गधा बैठा है।" सोचिए उस बेंत के कोने के रूबरू बैठे लड़के का क्या जवाब रहा होगा? ;)
Bekhud Badayuni

दर्द-ए-दिल में कमी न हो जाए

दर्द-ए-दिल में कमी न हो जाए दोस्ती दुश्मनी न हो जाए तुम मिरी दोस्ती का दम न भरो आसमाँ मुद्दई न हो जाए बैठता है हमेशा रिंदों में कहीं...
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