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मन, मौन और मान
मन, मौन और मान
रोज़ सुबह खड़े हो जाते हैं
स्टार्टिंग लाइन पे
रेस के लिए
जैसे कोई
बुल-फाइट
होने वाली हो
और लक्ष्य होता है
ख़ुद को बचाने का
और
'मैं' प्रत्यक्ष
सब देखता...
दिल चुराकर न हमको
दिल चुराकर न हमको बुलाया करो
गुनगुना कर न गम को सुलाया करो,
दो दिलों के मिलन का यहाँ है चलन
खुद न आया करो तो बुलाया...
मन के दरवाज़े
'Man Ke Darwaze', a poem by Rahul Boyal
न जाने मन के कितने दरवाज़े हैं
और कितनी खिड़कियाँ!
कौन कब चला आता है, कुछ पता नहीं
कौन कब...
दिल की रानी
"अमन का कानून जंग के कानून से जुदा है।"
"सल्तनत किसी आदमी की जायदाद नहीं बल्कि एक ऐसा दरख्त है, जिसकी हरेक शाख और पत्ती एक-सी खुराक पाती है।"
मन मूरख मिट्टी का माधो, हर साँचे में ढल जाता है
मन मूरख मिट्टी का माधो, हर साँचे में ढल जाता है
इसको तुम क्या धोखा दोगे, बात की बात बहल जाता है
जी की जी में रह जाती...
आधे मन से आलिंगन मत करना
जब कोई अनकहा सुन लेता हो
उससे झूठ मत बोलना
इससे सुनने की ताकत कम हो जाती है
जब कोई पढ़ लेता हो आँखों को तो
उससे मत छुपाओ...
नर हो, न निराश करो मन को
नर हो, न निराश करो मन को।
कुछ काम करो, कुछ काम करो
जग में रहकर कुछ नाम करो
यह जन्म हुआ किस अर्थ अहो
समझो जिसमें यह...
मन मीन
मछली, मछली, कितना पानी? ज़रा बता दो आज,
देखूँ, कितने गहरे में है मेरा जीर्ण जहाज़।
मन की मछली, डुबकी खाकर कह दो कितना जल है,
कितने...
मैं किसी आकुल हृदय की प्रीत लेकर क्या करूँगा
मैं किसी आकुल हृदय की प्रीत लेकर क्या करूँगा!
सिकुड़ती परछाइयाँ, धूमिल-मलिन गोधूलि-बेला,
डगर पर भयभीत पग धर चल रहा हूँ मैं अकेला,
ज़िंदगी की साँझ में...
तुमने क्यों न कही मन की
तुमने क्यों ने कही मन की?
रहे बंधु तुम सदा पास ही
खोज तुम्हें, निशि दिन उदास ही
देख व्यथित हो लौट गई मैं,
तुमने क्यों न कही...
आप ने क़द्र कुछ न की दिल की
'Aapne Qadr Kuchh Na Ki Dil Ki'
a ghazal by Hasrat Mohani
आप ने क़द्र कुछ न की दिल की
उड़ गई मुफ़्त में हँसी दिल की
ख़ू...
ऊधो जो अनेक मन होते
ऊधो जो अनेक मन होते
तो इक श्याम-सुन्दर को देते, इक लै जोग संजोते।
एक सों सब गृह कारज करते, एक सों धरते ध्यान।
एक सों श्याम...










