Tag: heart

मन, मौन और मान

मन, मौन और मान रोज़ सुबह खड़े हो जाते हैं स्टार्टिंग लाइन पे रेस के लिए जैसे कोई बुल-फाइट होने वाली हो और लक्ष्य होता है ख़ुद को बचाने का और 'मैं' प्रत्यक्ष सब देखता...
Gopal Singh Nepali

दिल चुराकर न हमको

दिल चुराकर न हमको बुलाया करो गुनगुना कर न गम को सुलाया करो, दो दिलों के मिलन का यहाँ है चलन खुद न आया करो तो बुलाया...
Rahul Boyal

मन के दरवाज़े

'Man Ke Darwaze', a poem by Rahul Boyal न जाने मन के कितने दरवाज़े हैं और कितनी खिड़कियाँ! कौन कब चला आता है, कुछ पता नहीं कौन कब...
premchand

दिल की रानी

"अमन का कानून जंग के कानून से जुदा है।" "सल्तनत किसी आदमी की जायदाद नहीं बल्कि एक ऐसा दरख्त है, जिसकी हरेक शाख और पत्ती एक-सी खुराक पाती है।"
Meeraji

मन मूरख मिट्टी का माधो, हर साँचे में ढल जाता है

मन मूरख मिट्टी का माधो, हर साँचे में ढल जाता है इसको तुम क्या धोखा दोगे, बात की बात बहल जाता है जी की जी में रह जाती...
Gaurav Adeeb

आधे मन से आलिंगन मत करना

जब कोई अनकहा सुन लेता हो उससे झूठ मत बोलना इससे सुनने की ताकत कम हो जाती है जब कोई पढ़ लेता हो आँखों को तो उससे मत छुपाओ...
Maithilisharan Gupt

नर हो, न निराश करो मन को

नर हो, न निराश करो मन को। कुछ काम करो, कुछ काम करो जग में रहकर कुछ नाम करो यह जन्म हुआ किस अर्थ अहो समझो जिसमें यह...
Balkrishna Sharma Naveen

मन मीन

मछली, मछली, कितना पानी? ज़रा बता दो आज, देखूँ, कितने गहरे में है मेरा जीर्ण जहाज़। मन की मछली, डुबकी खाकर कह दो कितना जल है, कितने...
Heart, Sun, Leaf

मैं किसी आकुल हृदय की प्रीत लेकर क्या करूँगा

मैं किसी आकुल हृदय की प्रीत लेकर क्या करूँगा! सिकुड़ती परछाइयाँ, धूमिल-मलिन गोधूलि-बेला, डगर पर भयभीत पग धर चल रहा हूँ मैं अकेला, ज़िंदगी की साँझ में...
Chandra Kunwar Bartwal

तुमने क्यों न कही मन की

तुमने क्यों ने कही मन की? रहे बंधु तुम सदा पास ही खोज तुम्हें, निशि दिन उदास ही देख व्यथित हो लौट गई मैं, तुमने क्यों न कही...
Hasrat Mohani

आप ने क़द्र कुछ न की दिल की

'Aapne Qadr Kuchh Na Ki Dil Ki' a ghazal by Hasrat Mohani आप ने क़द्र कुछ न की दिल की उड़ गई मुफ़्त में हँसी दिल की ख़ू...
bhartendu harishchandra

ऊधो जो अनेक मन होते

ऊधो जो अनेक मन होते तो इक श्याम-सुन्दर को देते, इक लै जोग संजोते। एक सों सब गृह कारज करते, एक सों धरते ध्यान। एक सों श्याम...
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