Tag: Kailash Gautam

Kailash Gautam

कविता मेरी

आलम्बन, आधार यही है, यही सहारा है कविता मेरी जीवन शैली, जीवन धारा है।यही ओढ़ता, यही बिछाता यही पहनता हूँ सबका है वह दर्द जिसे मैं अपना कहता...
Kailash Gautam

कैसे-कैसे लोग

यह कैसी अनहोनी मालिक, यह कैसा संयोग कैसी-कैसी कुर्सी पर हैं कैसे-कैसे लोग!जिनको आगे होना था वे पीछे छूट गए जितने पानीदार थे शीशे तड़ से टूट गए प्रेमचंद...
Kailash Gautam

कहीं चलो ना, जी!

आज का मौसम कितना प्यारा कहीं चलो ना, जी! बलिया बक्सर पटना आरा कहीं चलो ना, जी!हम भी ऊब गए हैं इन ऊँची दीवारों से, कटकर जीना पड़ता है मौलिक...
Kailash Gautam

कल से डोरे डाल रहा है

कल से डोरे डाल रहा है फागुन बीच सिवान में, रहना मुश्किल हो जाएगा प्यारे बंद मकान में।भीतर से खिड़कियाँ खुलेंगी बौर आम के महकेंगे, आँच पलाशों पर आएगी सुलगेंगे...

सन्नाटा

कलरव घर में नहीं रहा, सन्नाटा पसरा है, सुबह-सुबह ही सूरज का मुँह उतरा-उतरा है।पानी ठहरा जहाँ, वहाँ पर पत्थर बहता है, अपराधी ने देश बचाया हाकिम कहता...
Kailash Gautam

काली-काली घटा देखकर

काली-काली घटा देखकर जी ललचाता है, लौट चलो घर पंछी जोड़ा ताल बुलाता है।सोंधी-सोंधी गंध खेत की हवा बाँटती है, सीधी-सादी राह बीच से नदी काटती है, गहराता है रंग और मौसम लहराता है।लौट...
Indian Slum People, Poverty

दस की भरी तिजोरी

सौ में दस की भरी तिजोरी, नब्बे ख़ाली पेट झुग्गीवाला देख रहा है साठ लाख का गेट।बहुत बुरा है आज देश में लोकतन्त्र का हाल, कुत्ते खींच रहे...
Poor Old Man

मेरी नींदः रेत की मछली

'Meri Neend Ret Ki Machhli', a poem by Kailash Gautamमेरी नींद रेत की मछली हुई मसहरी में।धान पान थे खेत हमारे नहरें लील गईं, जैसे फूले...
Kailash Gautam

सब जैसा का तैसा

कुछ भी बदला नहीं फ़लाने! सब जैसा का तैसा है सब कुछ पूछो, यह मत पूछो आम आदमी कैसा है? क्या सचिवालय, क्या न्यायालय सबका वही रवैया है, बाबू बड़ा...
Kailash Gautam

यही सोचकर

यही सोचकर आज नहीं निकला गलियारे में मिलते ही पूछेंगे बादल तेरे बारे में।लहराते थे झील-ताल, पर्वत हरियाते थे हम हँसते थे झरना-झरना, हम बतियाते थे इन्द्रधनुष उतरा करता था एक इशारे...

सिर पर आग

सिर पर आग पीठ पर पर्वत पाँव में जूते काठ के क्या कहने इस ठाठ के।यह तस्वीर नई है भाई आज़ादी के बाद की जितनी क़ीमत खेत की कल थी उतनी क़ीमत खाद...
Kailash Gautam

गाँव गया था, गाँव से भागा

गाँव गया था गाँव से भागा। रामराज का हाल देखकर पंचायत की चाल देखकर आँगन में दीवाल देखकर सिर पर आती डाल देखकर नदी का पानी लाल देखकर और आँख में...

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