Tag: Pranjal Rai

Bridge

पुल की आत्मकथा

'Pul Ki Aatmakatha', a poem by Pranjal Rai मेरी देह पर देखो कितने पैरों के निशान हैं! जो गुज़रे मेरी पीठ पर चलते हुए, वे अगली सदी...
Bird, Water

विस्थापन के अंतरावकाश में

'Visthapan Ke Antaravkash Mein', a poem by Pranjal Rai एक ख़ानाबदोश की अन्तहीन यात्रा-सी ठौर दर ठौर सरकती है ज़िंदगी कि कुछ यात्राओं में पिछले क़दम की थकान ही अगले...
Fist, Protest, Dissent

टूटता तिलिस्म

'Tootata Tilism', a poem by Pranjal Rai संवादों के दौरान अक्सर अधूरे रह जाते हैं कुछ प्रश्न, कि प्रश्नों का अधूरा रह जाना कितना ज़रूरी है एक...
Room, Door, Window

प्रक्रिया

'Prakriya', Hindi poem by Pranjal Rai ठोकर खाकर गिरा एक बच्चा, किन्तु धूल झाड़ते हुए जो उठा वह एक समझदार आदमी था। इस बार वह और ज़्यादा ताक़त...
God, Abstract Human

अन्वीक्षण

मुझे तुम्हारे चेहरे से किसी भीगी किताब की गंध आती है- और लगता है अक्सर कि जीवन के अधिकतर सवालों के सामने हम एक ही कक्षा के विद्यार्थी...
Bridge, Leaf

गिरना एक पुल का

'Girna Ek Pul Ka', a poem by Pranjal Rai हमारे समय की देह पर सबसे गहरे रंग में सबसे गाढ़े अक्षरों में लिखा है - 'पतन', जहाँ सारी...
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