Tag: Prose

Adarsh Bhushan

विपश्यना

सहजता से कहे गए शब्दों के अर्थ अक्सर चेष्टापूर्ण और कठिन होते हैं जैसे तुमने कहा कि तुम्हें मेरा मौन काटता है और उससे...
Trilochan

गद्य-वद्य कुछ लिखा करो

गद्य-वद्य कुछ लिखा करो। कविता में क्या है। आलोचना जगेगी। आलोचक का दरजा – मानो शेर जंगली सन्नाटे में गरजा ऐसा कुछ है। लोग सहमते हैं। पाया...
Sitting Crossed Legs, Book

इंस्टा डायरी (दूसरी किश्त)

मुझे मेरी परछाई से शिकायत है, वह मेरी ठीक-ठीक आकृति नहीं बनाती। वह कभी मेरे कद से छोटा तो कभी मेरे कद से बड़ा तो कभी-कभी...
Sitting Crossed Legs, Book

इंस्टा डायरी

"मेरी परछाई मुझसे पीठ टिकाकर घण्टों मेरी चुप्पी सुनती है। उतरती-चढ़ती साँसों को रीढ़ की हड्डियों से महसूस कर पाना आसान नहीं, यह कला प्रेम करने वालोंं के हिस्से ही आती है..."
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