Tag: World Literature

Hermann Hesse

कितने बोझिल हैं दिन

'How Heavy The Days', a poem by Hermann Hesseअनुवाद: पुनीत कुसुम  (जेम्स राइट के अंग्रेज़ी अनुवाद पर आधारित)कितने बोझिल हैं दिन!कोई आग नहीं जो मुझे उष्णता...
Hermann Hesse

मैदानों में

अनुवाद: पुनीत कुसुमआकाश में, बादल चलते हैं खेतों में, हवा मैदानों में, मेरी माँ का खोया हुआ बच्चा भटकता हैसड़क के पार, पत्ते उड़ते हैं पेड़ों के पार,...
Kahlil Gibran - Poet

चतुर कुत्ता

अनुवाद: बलराम अग्रवालएक चतुर कुत्ता एक दिन बिल्लियों के एक झुण्ड के पास से गुज़रा।कुछ और निकट जाने पर उसने देखा कि वे कोई...
Lewis Carroll's The Jabberwocky

‘बकरसुरी’: लुइस कैरल की कविता ‘जैबरवॉकी’ का हिन्दी अनुवाद

'जैबरवॉकी' लुइस कैरल द्वारा लिखी गयी एक 'नॉनसेंस' अंग्रेजी कविता है, जिसमें 'जैबरवॉक' नामक एक प्राणी की हत्या के बारे में लिखा गया है। इस...
Kahlil Gibran

कविता

"जितना बोल चुका हूँ उससे ज्यादा कविता मेरे हृदय में हैं और जितना लिख चुका हूँ उससे कहीं ज्यादा मेरे खयालों में है..."
Maya Angelou

हर औरत को पता होना चाहिए

'Things Every Woman Should Have And Should Know', a poem By Pamela Redmond Satran अनुवाद: पुनीत कुसुमएक औरत के पास होना चाहिए पर्याप्त धन, अपने घर...
Heinrich Heine

हेनरिक हाइन

हेनरिक हाइन के उद्धरण | Heinrich Heine Quotes in Hindi अनुवाद: पुनीत कुसुम   "निस्संदेह भगवान मुझे माफ़ कर देगा। यह उसका काम है।"   "अनुभव एक अच्छा स्कूल है, पर...
My Name Is Red - Quotes in Hindi - Orhan Pamuk

ओरहान पामुक – ‘My Name Is Red’

"मैं पेड़ नहीं बनना चाहता, मैं पेड़ का मतलब होना चाहता हूँ।"   "बताओ तो फिर, प्रेम में इंसान मूर्ख हो जाता है या केवल मूर्ख...
Rainer Maria Rilke

निष्ठा

अनुवाद: धर्मवीर भारतीमेरी आँखें निकाल दो फिर भी मैं तुम्हें देख लूँगा मेरे कानों में सीसा उड़ेल दो पर तुम्हारी आवाज़ मुझ तक पहुँचेगी पगहीन मैं तुम तक...

मैं तुम्हें प्यार करता हूँ

मैं तुम्हें प्यार करता हूँ इसलिए नहीं कि तुम ऐसी हो अपितु इसलिए कि मैं ऐसा बन जाता हूँ जब मैं तुम्हारे साथ होता हूँमैं तुम्हें प्यार...
Ruskin Bond

रस्किन बॉण्ड

रस्किन बॉण्ड के उद्धरण | Ruskin Bond Quotes in Hindi अनुवाद: पुनीत कुसुम"युवा प्रेमियों के लिए लाल गुलाब। पुराने रिश्तों के लिए फ़्रेंच बीन्स।"   "प्रेम जो मृत्यु...
Gabriel García Márquez

दुनिया के सबसे ख़ूबसूरत आदमी का डूबना

"उन्होंने उस जितना लंबा, शक्तिशाली, साहसी, और सुंदर आदमी कभी नहीं देखा था, हालाँकि वे उसे देख रहे थे, वे उसके बारे में कल्पना नहीं कर पा रहे थे।"

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Jeete Jee Allahabad - Mamta Kalia

किताब अंश: ‘जीते जी इलाहाबाद’

'जीते जी इलाहाबाद' ममता कालिया की एक संस्‍मरणात्‍मक कृ‌ति है, जिसमें हमें अनेक उन लोगों के शब्दचित्र मिलते हैं जिनके बिना आधुनिक हिन्दी साहित्य...
Tumhari Kshay - Rahul Sankrityayan

राहुल सांकृत्यायन – ‘तुम्हारी क्षय’

राहुल सांकृत्यायन की किताब 'तुम्हारी क्षय' से उद्धरण | Quotes from 'Tumhari Kshya', a book by Rahul Sankrityayan चयन: पुनीत कुसुम   "उन्हीं के ख़ून से मोटी...
Rahul Sankrityayan

तुम्हारी जोंकों की क्षय

जोंकें? — जो अपनी परवरिश के लिए धरती पर मेहनत का सहारा नहीं लेतीं। वे दूसरों के अर्जित ख़ून पर गुज़र करती हैं। मानुषी...
Gaurav Bharti

कविताएँ: सितम्बर 2021

हादसा मेरे साथ प्रेम कम उसकी स्मृतियाँ ज़्यादा रहींप्रेम जिसका अन्त मुझ पर एक हादसे की तरह बीता मुझे उस हादसे पर भी प्रेम आता है। गंध मैं तुम्हें याद करता हूँ दुनिया...
Ravit Yadav

कुछ दूर चलते ही

घर में आख़िरी रात। समान लगाने की प्रक्रिया में भावनाओं को रोकना एक मुश्किल काम है। भावनाएँ जो इतने दिन दिल्ली में रहने से...
Leaves, Leaf, Difference, Different but same

व्याकरण

मेरे शरीर का व्याकरण अलग है सारे वाक्य तितर-बितर हैं पूर्ण-विराम असमय आ जाता है भूत वर्तमान भविष्य सब एक से है जहाँ संधि की ज़रूरत है वहाँ विच्छेद...
Ek Desh Barah Duniya - Shirish Khare

‘एक देश बारह दुनिया’ : हाशिए पर छूटे भारत की तस्वीर

पुस्तक: 'एक देश बारह दुनिया : हाशिए पर छूटे भारत की तस्वीर' लेखक: शिरीष खरे प्रकाशक: राजपाल एण्ड संससमीक्षा/टिप्पणी: आलोक कुमार मिश्रासंविधान में लिखा है— 'इंडिया...
Pramod Ranjan - Pankaj Pushkar

भाषायी असमानता को हमारे शिक्षण-संस्थान जन्म दे रहे हैं

'भाषायी असमानता को हमारे शिक्षण-संस्थान जन्म दे रहे हैं' : प्रमोद रंजन से पंकज पुष्कर की बातचीत पंकज पुष्कर: जन्म से लेकर अब तक आपकी...
Ek Bata Do - novel by Sujata

समीक्षा: ‘एक बटा दो’

किताब: 'एक बटा दो' लेखिका: सुजाता प्रकाशक: राजकमल प्रकाशनसमीक्षा/टिप्पणी: महेश कुमार स्त्री निर्मिति की विभिन्न चरणों की पड़ताल करके उससे बाहर निकलने का स्त्रीवादी विश्लेषण है 'एक...
Vijendra

कवि

मेरे लिए कविता रचने का कोई ख़ास क्षण नहीं। मैं कोई गौरय्या नहीं जो सूर्योदय और सूर्यास्त पर घौंसले के लिए चहचहाना शुरू कर दूँ।समय ही ऐसा है कि मैं...
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