तुम घटाना मत
अपना प्रेम,
तब भी नहीं
जब लोग करने लगें
उसका हिसाब।

ठगा हुआ पाओ
अपने को
अकेला
एक दिन,
तब भी नहीं।

मत घटाना
अपना प्रेम।

बन्द कर देगी तुमसे बोलना
नहीं तो
धरती यह, चिड़िया यह, घास यह…
मुँह फेर लेगा आसमान।

नहीं, तुम घटाना नहीं
अपना प्रेम।

Book by Prayag Shukla:

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प्रयाग शुक्ल
प्रयाग शुक्ल (जन्म १९४०) हिन्दी के कवि, कला-समीक्षक, अनुवादक एवं कहानीकार हैं। ये साहित्य अकादेमी का अनुवाद पुरस्कार, शरद जोशी सम्मान एवं द्विजदेव सम्मान से सम्मानित हैं।

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